राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में भी अब लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे है। अल्मोड़ा जिले में ठग हर रोज बड़ी संख्या में लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना रहे है। जबकि इस साल जिले में अब तक कई लोग ठगी का शिकार होकर अपनी जमा पूंजी गवा चुके है। अल्मोड़ा के सैकड़ों लोग साल में आसानी से ठगों का शिकार बन रहे हैं और अपनी जीवन भर की जमा पूंजी गवा रहे है। साइबर ठग युवा, बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों के अलावा पढ़े-लिखे लोगों को झांसे में ले रहे हैं। सोशल मीडिया, फोन-पे, गूगल-पे, व्हाट्सअप आदि के जरिए लोगों को अपने चंगुल में फंसाकर उनके खाते खंगाल रहे हैं। इधर, जिले के भतरौंजखान में ठगी मामले में साइबर ठगों के जाल में फंसे धारड़ गांव निवासी बुजुर्ग 20 दिन तक टॉर्चर होते रहे। इस दौरान वह हर एक घंटे में साइबर ठग को अपनी ही सुरक्षा का मैसेज करते रहे। उन्हें इस बात का एहसास कराया गया कि टीम आतंकवादियों को पकड़ने और उन्हें मामले से सुरक्षित निकालने में जुटे हुए हैं। साइबर ठगों ने उन्हें देश की सुरक्षा के नाम पर इतना भयभीत कर दिया कि वह इस बात को किसी से नहीं कह पाए और साइबर ठगों के शिकार बन गए।
सतर्कता ही बचाव
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि कभी किसी अंजान नंबर से फोन कर किसी स्वजन के अपराध में फंसे होने, परेशानी में होने या कोई की बात करता हैं, तो सबसे पहले व्यक्ति को उससे संपर्क करना चाहिए, जो अंजान नंबर से काल कर नाम ले रहा है। इससे स्थिति साफ हो जाएगी कि स्वजन किसी परिस्थिति में फंसा है या नहीं। जिससे की साइबर ठगी से बचा जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा साइबर ठग खुद को पुलिस अधिकारी बता कर फोन कर डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं, लेकिन डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। जागरूकता ठगों के जाल में आने से बचा जा सकता है।
एसएसपी ने की जनमानस से अपील
एसएसपी चंद्रशेखर घोड़के ने कहा कि पुलिस या किसी भी अन्य विभाग में डिजिटल अरेस्ट की कोई कानूनी प्रक्रिया नही है। सभी से अनुरोध है कि साइबर ठगों के झांसे में न आए। उन्होंने कहा कि यदि कभी भी किसी के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो तत्काल उसकी शिकायत हेल्प लाईन नंबर 1930 में करें। जिससे हमारी साइबर टीम आपकी धनराशि को बचाने की आवश्यक कार्रवाई जल्द कर सके।
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