कांग्रेस ने बुधवार को दावा किया कि सरकार महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए अगले पखवाड़े में संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में हैं, जो चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता को ‘‘मोदी
आचार संहिता’’ में बदल दिया है। अगले महीने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव है। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सितंबर 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन नारी वंदन अधिनियम, 2023 पारित करके किया गया था, जिसके माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में
महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने के लिए संविधान में संशोधन किया गया और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीट में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण भी प्रदान किया गया। परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये दोनों आरक्षण लागू होने थे।’’ उन्होंने कहा
कि जब नारी वंदन विधेयक, 2023 पर चर्चा हो रही थी, तब कांग्रेस ने इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की मांग की थी। रमेश के अनुसार, उस समय मोदी सरकार ने कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि परिसीमन और जनगणना दोनों को पहले पूरा करना होगा। उन्होंने दावा किया कि अब ‘‘पलटी मारने के
उस्ताद’’ ने 30 महीने बाद अचानक अपना मन बदल लिया है और परिसीमन एवं जनगणना की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही आरक्षण लागू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान भटकाने के हथियारों का उपयोग करने में माहिर हैं। वह ऐसा पहले भी कई बार कर चुके हैं और अब फिर वही
कर रहे हैं। अपनी विदेश नीति की विफलताओं तथा देश के सामने मौजूद एलपीजी और ऊर्जा संकट से ध्यान हटाने के लिए वह इस नयी पहल के साथ आए हैं।’’ उन्होंने कहा कि इसका पूरा राजनीतिक लाभ लेने के लिए प्रधानमंत्री ने यह जानकारी दे दी है कि नारी वंदन अधिनियम, 2023 में आवश्यक संशोधनों को पारित
करने के लिए अगले पखवाड़े में संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र सत्र बुलाया जाएगा। रमेश ने कहा, ‘‘विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि पहले 29 अप्रैल को मौजूदा विधानसभा चुनावों का दौर पूरा होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की जा सके। मोदी सरकार
लोकसभा और विधानसभा की सीट की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की भी योजना बना रही है। इस पर भी गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है।’’ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता को मोदी प्रचार संहिता बना दिया गया है। उनका कहना है, ‘‘अप्रैल में किसी भी दिन
दो-दिवसीय विशेष सत्र बुलाना एक आचार संहिता का उल्लंघन होगा लेकिन मोदी आचार संहिता के अनुरूप होगा।’’ रमेश ने दावा किया कि इससे यह सवाल भी गंभीर रूप से उठता है कि अप्रैल 2025 में घोषित जाति जनगणना को कराने के प्रति मोदी सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता क्या है, जबकि इससे पहले ‘भारत
जोड़ो न्याय यात्रा’ और 2024 लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान इस मांग को उठाने पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं पर ‘शहरी नक्सल मानसिकता’ का आरोप लगाया गया था।
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