इस साल होली का पर्व खास ज्योतिषीय संयोग में मनाया जाएगा, जो करीब सौ साल बाद बन रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन सूर्य, मंगल, बुध और राहु सभी कुंभ राशि में होने से चतुर्ग्रही और बुधादित्य योग बने हैं। ज्योतिषाचार्य रमाकांत दीक्षित के अनुसार होलिका दहन नियत समय पर हुआ। मंगलवार को चंद्र ग्रहण के कारण
होली बुधवार को मनाई जाएगी। चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 से शाम 6:48 बजे तक रहेगा। ग्रहण से पहले सुबह 6:20 बजे से सूतक शुरू होगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और पूजन या रंग खेलने जैसी गतिविधियां वर्जित मानी जाती हैं। ज्योतिषाचार्य महेश शास्त्री बताते हैं कि ग्रहण के समय मंदिर में प्रवेश करना, मूर्ति
को छूना, यात्रा करना और सामान्य भोजन करना वर्जित है। केवल बच्चे, वृद्ध और रोगी अत्यावश्यक होने पर भोजन कर सकते हैं, जिसमें दूध, दही और घी में तुलसी या कुश का पत्ता रखा जा सकता है। ग्रहण खत्म होने के बाद पानी ताजा कर लेना चाहिए। ग्रहण में ओम नमः शिवाय या अपने इष्ट देव का स्मरण, मंत्र जप और
चंद्र से संबंधित मंत्रों का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।
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