अमेरिका ने शीतकालीन ओलंपिक 2026 में पुरुष आइस हॉकी का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। रविवार को खेले गए रोमांचक फाइनल में अमेरिका ने कनाडा को 2-1 से हराया। जीत का निर्णायक गोल ओवरटाइम के पहले ही दो मिनट के भीतर जैक ह्यूजेस ने दागा। गौरतलब है कि यह अमेरिका की 1980 के लेक प्लेसिड ओलंपिक के बाद पहली स्वर्णिम सफलता है, जिसे ‘मिरेकल ऑन आइस’ के नाम से जाना जाता है। उस ऐतिहासिक जीत में अमेरिका ने सोवियत संघ को हराकर दुनिया को चौंका दिया था। फाइनल मुकाबला काफी हाई-वोल्टेज रहा। संतागिउलिया एरीना में दर्शकों का बड़ा हिस्सा कनाडाई समर्थकों का था और अमेरिकी टीम के वार्म-अप के दौरान उन्हें हूटिंग का सामना भी करना पड़ा। हालांकि मैच शुरू होते ही ‘यूएसए, यूएसए’ के नारे गूंजने लगे। पहले पीरियड में मैट बोल्डी ने शानदार खेल दिखाते हुए दो डिफेंडरों को छकाया और गोलकीपर जॉर्डन बिनिंगटन को चकमा देकर अमेरिका को 1-0 की बढ़त दिलाई। कनाडा ने दूसरे पीरियड में वापसी की, जब केल माकार के सटीक शॉट ने अमेरिकी गोलकीपर कॉनर हेलबक को मात दी। मौजूद जानकारी के अनुसार हेलबक ने शुरुआती 24 शॉट रोककर टीम को मुकाबले में बनाए रखा था। दूसरे पीरियड के अंत में ब्रॉक फेबर का शॉट दोनों पोस्ट से टकराकर बाहर आ गया, जिससे अमेरिकी खेमे की धड़कनें बढ़ गईं। निर्णय ओवरटाइम में हुआ, जहां तीन-के-तीन फॉर्मेट में जैक ह्यूजेस ने 1 मिनट 41 सेकंड में गोल दागकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। जीत के बाद खिलाड़ियों ने पूर्व एनएचएल खिलाड़ी जॉनी गॉद्रो की याद में ‘13’ नंबर की जर्सी उठाकर श्रद्धांजलि दी। बता दें कि 2024 में एक सड़क हादसे में गॉद्रो और उनके भाई की मौत हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी टीम को बधाई देते हुए इसे शानदार मुकाबला बताया। इस बीच फिनलैंड ने कांस्य पदक मुकाबले में स्लोवाकिया को 6-1 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। कुल मिलाकर यह फाइनल मुकाबला लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि इस जीत ने अमेरिकी आइस हॉकी को नई पहचान और आत्मविश्वास दिया है।
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