Friday , January 30 2026

इज़राइल-फलस्तीन संघर्ष: क्या भारत बनेगा शांति का सेतु? फलस्तीनी विदेश मंत्री ने जताई बड़ी उम्मीद

पश्चिम एशिया में दशकों से जारी इज़राइल-फलस्तीन संघर्ष को सुलझाने के लिए वैश्विक स्तर पर नए प्रयासों की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में, फलस्तीन की विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने भारत की कूटनीतिक शक्ति पर भरोसा जताते हुए एक बड़ा बयान दिया है। नई दिल्ली के दौरे पर आईं शाहीन ने स्पष्ट कहा कि भारत इस जटिल संघर्ष में एक प्रभावी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
इजराइल-फलस्तीन संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है भारत
फलस्तीन ने भारत से इजराइल-फलस्तीन संघर्ष में मध्यस्थता करने और गाजा में पुनर्निर्माण प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। भारत और अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आई फलस्तीन की विदेश एवं प्रवासी मामलों की मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने पीटीआई-वीडियो से बातचीत में कहा कि भारत के फलस्तीन और इजराइल दोनों से संतुलित संबंध उसे “मध्यस्थ और वार्ताकार” की भूमिका निभाने के लिए उपयुक्त बनाते हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात की सह-अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक 31 जनवरी को प्रस्तावित है, जिसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों की भागीदारी होगी। शाहीन ने कहा, “भारत एक महान देश है और इसमें (मध्यस्थता) बड़ी भूमिका निभा सकता है। फलस्तीन और इजराइल दोनों का मित्र होना भारत को दोनों देशों के बीच सेतु बनने की स्थिति में रखता है।” उन्होंने कहा, “अंतिम उद्देश्य शांति स्थापित करना है। ऐसी शांति जो दोनों के सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून और उसमें निहित सिद्धांतों का सम्मान करे।” फलस्तीन ने भारत से युद्धग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) का समर्थन करने का भी आग्रह किया। शाहीन ने कहा कि अक्टूबर 2023 से इजराइल के सैन्य अभियानों के कारण हुई व्यापक तबाही को देखते हुए गाजा को तत्काल सहायता की आवश्यकता है।
कूटनीतिक गलियारों में चर्चा: क्या बदलेगी भारत की भूमिका?
भारत अब तक इस संघर्ष पर ‘संतुलित दृष्टिकोण’ अपनाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां आतंकवाद के खिलाफ इज़राइल का समर्थन किया, वहीं फलस्तीन को मानवीय सहायता और संप्रभु राज्य की मांग का समर्थन भी जारी रखा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर कई बार कह चुके हैं कि भारत शांति के लिए हर संभव संवाद का समर्थन करता है। शाहीन का यह प्रस्ताव भारत के लिए एक बड़ा अवसर और चुनौती दोनों है। यदि भारत मध्यस्थता के लिए आगे आता है, तो यह ‘ग्लोबल साउथ’ के नेता के रूप में उसकी छवि को और मजबूत करेगा।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com