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BLO ड्यूटी में शिक्षक… कैसे हो बच्चों की पढ़ाई! 24 जनवरी से होंगी परीक्षाएं

प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में गत कई महीनो से चल रही उथल-पुथल से शिक्षा व्यवस्था बेपटरी होती जा रही है। शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों में लगने से परिषदीय बच्चों की पढ़ाई या तो शिक्षामित्र या कुछ विद्यालयों में एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। वर्ष 2025 में जून-जुलाई माह में हुई स्कूल पेयरिंग फिर टीईटी मुद्दा, ऑनलाइन हाजिरी के बाद अब सरप्लस समायोजन के चक्कर में शिक्षक खींचातानी में मानसिक तौर पर परेशान है जिसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। पिछले दो माह से चल रहे एसआईआर ड्यूटी में शिक्षक-शिक्षामित्र लगाए गए हैं। बीएलओ में ड्यूटी लगने से नौनिहालों की शिक्षा केवल कागजों पर चलती नजर आ रही है। कहीं एक शिक्षक, तो कहीं शिक्षामित्र के सहारे चल रहे स्कूल में बच्चे आते हैं और खेलकूद कर चले जाते हैं। जानकारों की माने तो अकेले लखनऊ में 3 हजार से अधिक शिक्षक व शिक्षामित्र बीएलओ ड्यूटी में लगाए गए हैं। शिक्षक संगठनों ने कई बार शिक्षकों को निर्वाचन ड्यूटी से हटाने की मांग की लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसे नकारते नजर आए। इतना ही नहीं, बीएलओ के साथ शिक्षक बोर्ड परीक्षा ड्यूटी, प्रतियोगिता परीक्षाएं, पल्स पोलियो जैसे सैकड़ो गैर शैक्षणिक कार्य में लगा दिए जाते हैं जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है।
24 जनवरी से होंगी परीक्षाएं
परिषदीय विद्यालयों में 24 जनवरी से द्वितीय सत्र परीक्षाएं आरंभ हो रही हैं। उसके बाद 27 जनवरी से निपुण आंकलन होना है, लेकिन प्रश्न यह है कि जब विद्यालय में शिक्षक ही नहीं हैं तो परीक्षाएं और आंकलन कैसे होगा। शिक्षक का मूल कार्य अध्यापन करना है किंतु आज इनसे शिक्षण कार्य के अतिरिक्त सारे गैर शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं। शिक्षक के आवाज उठाने पर अधिकारी वेतन रोकने, सस्पेंड करने जैसी मानसिक प्रताड़ना देते हैं। बच्चों की शिक्षा संवैधानिक अधिकार है लेकिन उनकी शिक्षा को प्राथमिकता न देकर अन्य कार्यों को कराया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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