इस दिवाली घरों में मिट्टी के दीयों के साथ गोबर के दीयों की भी खास चमक दिखाई देगी। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मलिहाबाद के गणेश स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए गोबर के दीये दिवाली पर धार्मिक, आध्यात्मिक और पर्यावरण के महत्व को बढ़ावा देंगे। समूह की महिलाओं ने त्योहार के लिए 40 हजार गोबर के दीये बनाए हैं। इनमें से ज्यादातर दीये लखनऊ में दिवाली पर घरों को रोशन करेंगे, जबकि पांच हजार दीये वाराणसी में देव दीपावली के अवसर पर जगमगाएंगे। इस पहल से करीब 40 महिलाओं को घर बैठे रोजगार भी मिला है। जो दिवाली पर लखनऊ में घरों को रोशन करेंगे। साथ ही पांच हजार दीये वाराणसी में देव दीपावली को जगमग करेंगे।
तीन रुपये में मिल रहा गोबर का दीया
करीब 40 महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिला है। एक दीये की फुटकर कीमत तीन रुपये है। इसमें दो रुपये लागत व एक रुपये बचत है। 11 दीयो का पैकेट 33 रुपये और 50 दीयों का पैकेट 125 रुपये का है। बड़े दीये भी बनाए हैं। इसकी कीमत पांच रुपये है।
अब तक 20 हजार दीयों की हो चुकी है बिक्री
मलिहाबाद के गणेश स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस काम में जुटी हैं। ग्राम अटौरा निवासी समूह की सदस्य रीता देवी का कहना है कि गाय के गोबर को पवित्र माना जाता है और इसमें मां लक्ष्मी का वास होता है। इसे जलाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता आती है। इसी मान्यता को बढ़ावा देने के लिए मिशन से सीआईएफ (फंड) लेकर त्योहर के लिए दीये तैयार कर रहे हैं। अन्य समूह को भी इस काम से जोड़ रखा है।
गोबर की हवन स्टिक भी बना रहीं महिलाएं
समूह की महिलाएं केवल दीये ही नहीं, बल्कि गोबर से हवन में इस्तेमाल होने वाली स्टिक भी तैयार कर रही हैं। इसके अलावा गोबर की स्टिक भी बनाए हैं। जो हवन सामग्री में प्रयोग की जाती है। एक स्टिक की कीमत सात रुपये है। अब तक 20 हजार दीये ऑर्डर पर भेज चुके हैं। इसमें ज्यादातर अधिकारियों ने दीये खरीदें हैं। करीब पांच हजार दीये देव दीपावली के लिए बनारस में खरीदे गए हैं। इस कार्य में महिलाओं प्रति दीया एक रुपये मिलता है। इससे कई परिवारों की आजीविका में सुधार आएगा। इस पहल से त्योहार की तैयारियों के साथ महिलाओं की आजीविका को भी नई रोशनी मिल रही है।
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