ऐशबाग रामलीला मैदान रविवार को प्रभु श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान के जयघोष से गूंज उठा। कोलकाता के कलाकारों ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। अशोक वाटिका में माता सीता और रावण संवाद से लेकर हनुमान जी के लंका प्रवेश, अक्षयकुमार वध और रावण दरबार तक के दृश्य मंचित किए गए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से लंका दहन का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। दर्शक दीर्घा में बैठे श्रद्धालु ‘सियावर रामचंद्र की जय’ और ‘पवनसुत हनुमान की जय’ के उद्घोष करने लगे। मंचन में त्रिजटा-सीता संवाद, किष्किंधा पर्वत पर राम-लक्ष्मण संवाद, सुग्रीव पर लक्ष्मण जी का क्रोध, वानर दल की सीता खोज यात्रा, स्वयंप्रभा और सम्पाती से मिलन तथा हनुमान-विभीषण संवाद जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर किया। रामोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर नृत्य गुरु व नृत्य निर्देशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने साथियों के साथ देवी गीत, राम रमैया और देवी डांडिया पर आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद आंचल समाजोत्थान सेवा समिति ने आरती शुक्ला के निर्देशन में सांस्कृतिक गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। ऐशबाग श्रीरामलीला समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र अग्रवाल ने बताया कि विजयादशमी पर 75 फुट के रावण का दहन किया जाएगा। इस दौरान करीब एक घंटे तक आकाशीय आतिशबाजी भी होगी।
महानगर रामलीला में शबरी मिलन से लंका दहन तक के प्रसंगों ने मोहा मन
महानगर में चल रही श्री रामलीला में रविवार को शबरी प्रसंग से लेकर लंका दहन तक की भावुक और रोमांचक प्रस्तुति हुई। लीला से पूर्व समिति के संरक्षक संजय श्रीवास्तव, महासचिव हेम पंत, मृत्युंजय पांडे और आनंद सिंह ने मां काली की आरती कर शुरुआत की। मुख्य आकर्षण शबरी प्रसंग रहा, जिसमें भक्त के निश्चल प्रेम और राम की कृपा का संगम दिखा। इसके बाद रामविलाप, हनुमान मिलन, राम-सुग्रीव मैत्री, बाली उद्धार का मंचन हुआ। शाम को सीता खोज, अशोक वाटिका में हनुमान द्वारा सीता को अंगूठी देना, हनुमान-रावण संवाद और लंका दहन की भव्य लीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पंचवटी से बालि वध तक के प्रसंग जीवंत
सेक्टर-ए सीतापुर रोड योजना कॉलोनी में चल रही 34वीं पांच दिवसीय रामलीला के तीसरे दिन रविवार को पंचवटी, सीताहरण और बालि वध के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। भगवान शिव की आरती के साथ मंचन शुरू हुआ। सूर्पनखा ने नृत्य से राम को रिझाने का प्रयास किया, राम ने लक्ष्मण के पास भेजा। लक्ष्मण द्वारा नाक काटे जाने पर रावण ने छल से सीता हरण किया। सीता वियोग में राम की व्याकुलता ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। जटायु द्वारा सीता की रक्षा के लिए प्राण देने, हनुमान मिलन, सुग्रीव मित्रता और बालि वध के प्रसंगों में कलाकारों के सजीव अभिनय को दर्शकों ने तालियों से सराहा।
GDS Times | Hindi News Latest News & information Portal