Wednesday , October 7 2026

काशी से क्योटो तक मजबूत हुई भारत-जापान की दोस्ती, जापानी कंपनियों से किए 90,000 करोड़ के समझौते

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत-जापान संबंधों को विश्वास की विरासत, विकास की साझेदारी और दो प्राचीन संस्कृतियों की आत्मीयता का जीवंत सेतु बताया है। बुधवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे ने दोनों देशों की मैत्री को नई ऊंचाइयां दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-जापान की इसी आत्मीय मैत्री और शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का बुधवार को काशी में लोकार्पण होगा। इस अवसर पर रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में वह शामिल होंगे।
सांस्कृतिक रिश्तों के साथ आर्थिक साझेदारी भी मजबूत
योगी आदित्यनाथ ने भारत-जापान संबंधों के आर्थिक पक्ष को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही आत्मीयता अब आर्थिक साझेदारी की नई ताकत बन रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश जापानी कंपनियों के साथ करीब 90 हजार करोड़ रुपये के एमओयू कर चुका है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध विश्वास की विरासत और विकास की साझेदारी पर आधारित हैं। दोनों देशों की प्राचीन संस्कृतियों के बीच आत्मीय जुड़ाव इन रिश्तों को विशेष बनाता है।
काशी-क्योटो जुड़ाव को बताया रिश्तों की मिसाल
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काशी और क्योटो के बीच जुड़ाव भारत-जापान संबंधों को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण सेतु है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते अब सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव से आगे बढ़कर आर्थिक सहयोग की दिशा में भी नई संभावनाएं बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि काशी से क्योटो तक और आस्था से अर्थव्यवस्था तक भारत-जापान की मैत्री साझी समृद्धि की नई राह तैयार कर रही है। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर खुद भी भारत-जापान सहयोग का एक प्रमुख प्रतीक है। केंद्र की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इसका निर्माण जापान की ग्रांट सहायता से हुआ है और यह भारत-जापान मैत्री तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

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