भारत की सरकारी तेल और प्राकृतिक गैस कंपनी ओएनजीसी ने बंगाल की खाड़ी के पास महानदी बेसिन के गहरे समंदर में गैस के एक बहुत बड़े भंडार की खोज कर दी है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनसर्टेनिटी बनी हुई है तो वहीं भारत की यह खोज देश की ऊर्जा सुरक्षा यानी कि एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक नया मोड़ साबित हो गया है। यह खोज महानदी बेसिन के डीप वाटर इलाके में हुई है। इस कुएं का नाम एमडीw है। ओएनजीसी के मुताबिक इस कुएं से 18 सितंबर 2026 को ड्रिलिंग पूरी होने के बाद गैस फ्लो शुरू हो गया। फिलहाल कुएं से काफी अच्छी दर पर गैस बाहर निकल रही है और कुएं के अंदर रिजवियर प्रेशर भी काफी मजबूत और स्वस्थ स्तर पर बना हुआ है जो इस बात का संकेत है कि अंदर गैस का विशाल भंडार हो सकता है। भारत सरकार ने देश के समुद्री इलाके में छुपे तेल और गैस को ढूंढने के लिए समुद्र मंथन नामक एक विशेष पहल शुरू की। इस डीप वाटर अभियान की शुरुआत पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 25 जुलाई को की। एमडी डब्ल्यू28 इस नए अभियान के तहत खोदा गया पहला हुआ था और पहली ही कोशिश में ओएनजीसी को इतनी बड़ी सफलता हाथ लग गई। तीसरा लागत कम होगी और उत्पादन तेजी से शुरू होगा। यानी शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर। शेयर्ड फैसिलिटी का इस्तेमाल ओएनजीसी के अनुसार पीएनजी रूल्स 2025 के तहत इस नए कुएं को महानदी बेसिन में पहले से मजबूत दूसरे खोजों के साथ जोड़कर विकसित किया जा सकता है। अलग-अलग कुओं के लिए अलग-अलग महंगा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के बजाय शेयरर्ड सुविधाओं का इस्तेमाल होगा। इससे गैस निकलने की लागत यानी कि डेवलपमेंट कॉस्ट घटेगी और कम समय में गैस को सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचाया जा सकेगा। आयात पर निर्भरता कम होगी। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल और प्राकृतिक गैस दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है। जिस पर हर साल अरबों डॉलर खर्च होते हैं। दूसरा घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी। देश के भीतर घरेलू गैस उत्पादन बढ़ने से डॉलर की बचत होगी और देश ऊर्जा के मामलों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। हालांकि इस खोज का वास्तविक कमर्शियल महत्व और कुल भंडार कितना बड़ा हो सकता है, इसका अंतिम आंकड़ा आगे की जांच और टेस्टिंग के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगा। कुल मिलाकर महारदी बेसिन में हुई एमडीडब्ल्यू की यह खोज भारत के एनर्जी सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत है। ओएनजीसी ने साफ कर दिया है कि वो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बनाने के लिए गहरे और अति गहरे यानी अल्ट्रा डीप वाटर समुद्री इलाकों में अपनी खोज को और तेज करेगी। क्या आपको लगता है कि समंदर में मिलने वाले यह नए भंडार और आने वाले समय में भारत को तेल और गैस के मामलों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बना पाएंगे?
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