अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-रायबरेली परिसर में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों और उनके तीमारदारों के लिए रात्रि विश्राम गृह बनाया जाएगा। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सुविधा के शुरू होने से दूर-दराज के जिलों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों को सुरक्षित और स्वच्छ आवास उपलब्ध हो सकेगा।
वर्तमान में कई तीमारदार अपने परिजनों के उपचार के दौरान अस्पताल परिसर या खुले स्थानों पर रात बिताने को मजबूर होते हैं। एम्स के अधिकारियों के अनुसार, संस्थान के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में प्रतिदिन विभिन्न जिलों से करीब 3,000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी और आपातकालीन सेवाओं के माध्यम से भर्ती भी किए जाते हैं, जिससे तीमारदारों के लिए ठहरने की व्यवस्था की आवश्यकता बढ़ गई है। इस परियोजना को एम्स-रायबरेली और सेवा दान आरोग्य संस्था के बीच बृहस्पतिवार को हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत लागू किया जाएगा। एमओयू का आदान-प्रदान एम्स के उपनिदेशक (प्रशासन) कर्नल अखिलेश सिंह और सेवा दान आरोग्य संस्था के प्रतिनिधि अमित दास ने कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अमिता जैन तथा अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में किया। कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अमिता जैन ने कहा कि मरीजों के परिजनों और तीमारदारों के लिए सम्मानजनक आवास की व्यवस्था संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस पहल से मरीजों के परिवारों को काफी लाभ मिलेगा। संस्थान ने कहा कि परिसर में रात्रि विश्राम गृह बनने से हजारों मरीजों और उनके तीमारदारों के उपचार संबंधी अनुभव में सुधार होगा, क्योंकि उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध हो सकेगा।
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