उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-6 (SDG-6) के मानक को पूरा कर लिया है। जल संरक्षण अभियानों के चलते राज्य में भूजल दोहन की दर में कमी आई है और भूजल रिचार्ज क्षमता में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भूगर्भ जल विभाग के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद चलाए गए विभिन्न जल संरक्षण अभियानों का असर अब दिखाई दे रहा है। प्रदेश में भूजल दोहन दर 71.26 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2025 में 70 प्रतिशत रह गई है। वहीं, वार्षिक भूजल रिचार्ज क्षमता 69.91 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) से बढ़कर 73.39 बीसीएम हो गई है।
अतिदोहित क्षेत्रों में आई कमी
भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने बताया कि वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, चेकडैम निर्माण और भूजल पुनर्भरण जैसे अभियानों से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। प्रदेश में अतिदोहित विकासखंडों की संख्या 82 से घटकर 44 रह गई है, जबकि सुरक्षित श्रेणी वाले विकासखंडों की संख्या 540 से बढ़कर 563 हो गई है।
कैच द रेन अभियान से बदली तस्वीर
प्रदेश में कैच द रेन अभियान (2021-2025) के तहत बड़े स्तर पर जल संरक्षण कार्य किए गए। इस दौरान 3.39 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया। 1.34 लाख पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन हुआ। 35,206 सरकारी और अर्धसरकारी भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए। वहीं, अटल भूजल योजना के तहत 550 ग्राम पंचायतों में किए गए अध्ययन में 303 पंचायतों में भूजल स्तर में 0.5 से 2 मीटर तक सुधार पाया गया।
चेकडैम और तालाबों से बढ़ा जल भंडारण
जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए लघु सिंचाई विभाग ने 6,627 चेकडैम और 1,417 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया। इसके अलावा ग्राम्य विकास विभाग ने 19,974 अमृत सरोवर और कृषि विभाग ने 37,273 खेत तालाब विकसित किए। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से भूजल पुनर्भरण बढ़ा है और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में सुधार हुआ है। आने वाले समय में जल संरक्षण के इन अभियानों को और विस्तार देने की योजना है।
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