उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण और गो आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल अब देश और विदेश में पहचान बना रही है। प्रदेश में तैयार किए जा रहे पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई समेत कई देशों तक पहुंच रहे हैं। राज्य सरकार का दावा है कि गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर सृजित हुए हैं। प्रदेश में देसी गायों से तैयार पंचगव्य घृत, गोमूत्र अर्क, च्यवनप्राश, गो घृत और अन्य आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग बढ़ी है। गोबर, गोमूत्र और दुग्ध उत्पादों को बाजार से जोड़कर उन्हें आय का स्रोत बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। गो संरक्षण के इस मॉडल को देखने और समझने के लिए गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत 15 से अधिक राज्यों के लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। गाजियाबाद के उद्यमी असीम रावत भी गो आधारित उत्पादों के उत्पादन और विपणन से जुड़े मॉडल पर विभिन्न राज्यों के लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। राज्य सरकार साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी देसी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्नत नस्ल की गायों के पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का मानना है कि गो आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने से किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
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