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जोजिला सुरंग परियोजना ने हासिल किया ऐतिहासिक मील का पत्थर, आपस में जुड़े बालटाल और लद्दाख के मिनीमर्ग

श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जोजिला सुरंग परियोजना ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया जब मुख्य सुरंग की खुदाई का काम पूरा होने के बाद पहली बार कश्मीर के बालटाल और लद्दाख के मिनीमर्ग के दोनों छोर आपस में जुड़ गये।

नितिन गडकरी ने रिमोट से किया धमाका
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मिनीमर्ग में पूर्वी प्रवेश-द्वार के पास अंतिम विस्फोट करने के लिये एक रिमोट का बटन दबाया, जिसके साथ ही सुरंग के दोनों छोर आधिकारिक तौर पर जुड़ गये और इसके साथ ही यह उपलब्धि भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र के इतिहास में दर्ज हो गयी। इस समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उपस्थित थे।
लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिये एक जीवनरेखा बनेगी जोजिला टनल
इस परियोजना को “भारत की तकनीकी शक्ति, इंजीनियरिंग क्षमता और अदम्य संकल्प” का प्रतीक बताते हुये श्री गडकरी ने कहा कि यह सुरंग इस क्षेत्र को हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित कर लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लिये एक जीवनरेखा बनेगी। परियोजना से जुड़े अधिकारियों, इंजीनियरों, मजदूरों और श्रमिकों को संबोधित करते हुये श्री गडकरी ने कहा, “यह भारत के बुनियादी ढांचे के विकास का एक स्वर्णिम काल है। करीब 14 किलोमीटर लंबी यह सुरंग अत्याधुनिक है और विश्वस्तरीय सुरक्षा मानकों के अनुसार बनाई गयी है।”
बालटाल और मिनीमर्ग के जुड़ने से लद्दाख की बढ़ी ताकत
गडकरी ने कहा कि बरसों पहले भाजपा अध्यक्ष के रूप में लद्दाख की अपनी पहली यात्रा के दौरान लोगों ने उन्हें बताया था कि भारी हिमपात के कारण जोजिला दर्रा हर साल लगभग छह महीने बंद रहता है, जिससे लद्दाख का संपर्क कट जाता है। उन्होंने कहा, “मैंने लद्दाख के लोगों की कठिनाइयों को महसूस किया और इस सुरंग के महत्व को समझा।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सरकार गठन के बाद बुनियादी ढांचे के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आकार लेने से पहले इस परियोजना को बार-बार देरी का सामना करना पड़ा था।
टेंडर पहले चार बार मंजूर हो चुका था, लेकिन कोई फैसला नहीं लिया गया। जब अनुमानित लागत 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी, तो मैंने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये। आज मुझे खुशी है कि इतने बड़े पैमाने पर काम होने के बावजूद, हम लगभग 5,000 करोड़ रुपये बचायेंगे।” उन्होंने इस सुरंग को महज एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं बल्कि “एक जीवनरेखा” और “नये भारत की तकनीकी उत्कृष्टता का एक उदाहरण” बताया। केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय मजदूरों के योगदान की भी सराहना करते हुये कहा कि निर्माण में शामिल लगभग 80 प्रतिशत कार्यबल इसी क्षेत्र से था।
भारत की सबसे लंबी और एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक सुरंग
उन्होंने दुनिया के सबसे कठिन इलाकों में से एक में अथक परिश्रम करने के लिये जम्मू-कश्मीर प्रशासन, एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों, इंजीनियरों, सलाहकारों और निर्माण एजेंसियों को धन्यवाद दिया। अधिकारियों ने कहा कि इस सफलता के साथ ही 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग का महत्वपूर्ण खुदाई चरण पूरा हो गया है। चालू होने के बाद यह भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग और एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक सुरंग के रूप में जानी जायेगी। इस सुरंग से सोनमर्ग और द्रास के बीच यात्रा का समय लगभग तीन घंटे से घटकर करीब 15 मिनट होने की उम्मीद है। यह लद्दाख के लिये साल भर संपर्क भी सुनिश्चित करेगी।
जुड़े कश्मीर-लद्दाख के दोनों छोर
फिलहाल लद्दाख का संपर्क सर्दियों के दौरान जोजिला अक्ष पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण कट जाता है। अधिकारियों ने कहा कि खुदाई के काम में तो सफलता हासिल हो गयी है, लेकिन सुरक्षा प्रणाली, परिष्करण व शेष बचे काम जारी रहने की उम्मीद है। पूरी परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जोजिला सुरंग भारत के लिए अत्यधिक रणनीतिक महत्व रखती है क्योंकि यह कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क प्रदान करेगी।
चीन-पाकिस्तान सीमा के पास भारत की बड़ी कामयाबी
यह क्षेत्र पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा दोनों के करीब स्थित है। एक बार चालू होने के बाद, यह सुरंग लद्दाख के अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों, हथियारों, ईंधन और आवश्यक आपूर्ति की तेजी से आवाजाही सुनिश्चित करेगी, जिससे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में भारत की रक्षा तैयारियों को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी।

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