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जहां सांप करते हैं विचरण, उस मिट्टी से बने हैं एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग…

तेलंगाना के सिद्धिपेट जिले के दो तालाब ऐसे हैं, जहां सांप विचरण करते हैं। उन्हीं तालाबों की मिट्टी को निकालकर एक करोड़ शिवलिंग बनाए गए हैं।
विश्व में पहली बार काशी में हो रहे कोटि पार्थिव लिंगार्चन महानुष्ठान में भगवान शिव की अराधना के लिए ऐसी मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग तैयार किए गए हैं, जहां शिव के गण सर्प की अधिकता है। तेलंगाना के सिद्धिपेट जिले के दो तालाब ऐसे हैं, जहां सांप विचरण करते हैं। उन्हीं तालाबों की मिट्टी को निकालकर एक करोड़ शिवलिंग बनाए गए हैं।

आध्यात्मिक एवं धार्मिक संस्था विजयानंदनाथ गुरु सेवा समिति (हैदराबाद) के व्यवस्थापक अध्यक्ष स्वामी तंगीराला रामचंद साई के मन में दो साल पहले कोटि पार्थिव शिवलिंग पूजन का भाव आया था। उन्होंने तभी से इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। संस्था के जनरल सेक्रेटरी डॉ. जीके वैंकट ने बताया कि धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से मिट्टी सही हो, तभी पार्थिव शिवलिंग बनेंगे। इसके लिए वैज्ञानिकों की भी मदद ली गई। वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी मिट्टी तलाशी गई जिसमें सल्फर की मात्रा ज्यादा हो। सल्फरयुक्त मिट्टी फटती नहीं है। वहीं, आध्यात्मिक दृष्टि से ऐसी मिट्टी की खोज की गई जहां शिव के गण का वास हो। दोनों ही पैमाने पर सिद्धिपेट जिले के दो तालब की मिट्टी उपयुक्त पाई गई। दोनों तालाबों से 65 टन मिट्टी निकालकर उसमें गोमूत्र, घी और गंगाजल मिलाकर शिवलिंग बनाए गए।

चार माह में हुआ तैयार

पार्थिव शिवलिंग बनाने में चार माह लगे थे। डॉ. जीके बैंकट ने बताया कि 500 सांचे के जरिये पांच हजार महिलाओं और बच्चों ने मिलकर एक करोड़ शिवलंग तैयार किया।

कलियुग में नहीं हुए हैं ऐसे अनुष्ठान

कलिकाल में एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग का पूजन पहली बार हो रहा है। संस्था के जनरल सेक्रेटरी जीके बैंकट ने बताया कि कलिकाल में एक करोड़ रुद्राकार (शिवलिंग के पिंड रूप में) में पूजन तो हुए हैं, मगर पार्थिव शिवलिंग का पूजन कभी नहीं हुआ है। इससे विश्व का कल्याण होगा और शांति आएगी।

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