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ईरान में हिजाब के खिलाफ महिलाओं का आंदोलन उग्र

ईरान में हिजाब के खिलाफ महिलाओं का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। तेहरान के अलावा भी कई शहरों में महिलाओं का आंदोलन तेज हो गया है और इस बीच कुर्दिस्तान में सुरक्षा बलों की फायरिंग में तीन लोगों की मौत हुई है। महसा अमीनी नाम की जिस 22 साल की युवती की पुलिस हिरासत में तबीयत बिगड़ने से मौत हुई थी, वह इसी प्रांत की रहने वाली थीं। ऐसे में कुर्दिस्तान में आंदोलनों का दौर तेज हो गया है। ईरान में महिलाओं के लिए कड़ा ड्रेस कोड लागू है। ये पाबंदियां 1979 की ईरानी क्रांति के बाद लागू की गई थीं। हालांकि 40 साल पहले अन्य देशों की तरह ही ईरान में भी महिलाओं को काफी आजादी थी। 

तेहरान में सैकड़ों की संख्या में जुटी महिलाओं और पुरुषों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया था और आंसू गैस के गोले भी दागे थे। ईरानी न्यूज इरना के मुताबिक कुर्दिस्तान में पुलिस की फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई है। हालांकि राज्य के गवर्नर का कहना है कि ये मौतें पुलिस की फायरिंग में नहीं हुई हैं बल्कि इसके लिए ‘आतंकी समूह’ जिम्मेदार हैं। बता दें कि ईरानी अथॉरिटीज ने विरोध प्रदर्शन करने वालों को देशद्रोही और आतंकी करार दिया है। कुर्दिस्तान के साघेज में महसा अमीनी को पुलिस ने हिजाब पहनने पर अरेस्ट कर लिया था और उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। तीन दिनों तक कोमा में रहने के बाद अमीनी की मौत हो गई थी। 

अमीनी की मौत के बाद से ईरान में गुस्सा भड़का है और दशकों बाद इतना बड़ा आंदोलन देखने को मिल रहा है। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने अपने बालों को काटकर और हिजाब को जलाकर विरोध दर्ज कराया था। तेहरान और तासनिम जैसे शहरों के विश्वविद्यालयों में छात्र बड़ी संख्या में रैलियां निकाल रहे हैं। यही नहीं अब यह आंदोलन तबरीज और हमदान जैसे शहरों तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर भी महिलाएं वीडियो शेयर कर रही हैं, जिसमें उन्हें तानाशाही मुर्दाबाद और आजादी के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। एक वीडियो में दिखता है कि कार के बोनट पर बैठी महिला अपने हिजाब को आग लगा देती है। 

2019 में भी ईरान में हुआ था ऐसा ही हिंसक आंदोलन

इससे पहले ईरान में 2019 में इस तरह का हिंसक आंदोलन देखने को मिला था। तब प्रदर्शनकारी महंगे ईंधन के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। दरअसल ईरान की कमान पर राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के हाथों में है, जिन्हें इस्लाम का जानकार माना जाता है और वह शरिया नियमों को कट्टरता से लागू करने में यकीन रखते रहे हैं। माना जाता है कि उनके आने के बाद से ईरान में महिलाओं पर पाबंदियां और कड़ी हो गई हैं। 

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