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भगवान शिव के धनुष के नाम पर रखे गए राकेट लांचर पिनाक एक बार फ‍िर सुर्खियों में

भगवान शिव के धनुष के नाम पर रखे गए राकेट लांचर पिनाक एक बार फ‍िर सुर्खियों में है। इसकी खूबियां ऐसी है क‍ि दुश्‍मन भी कांप उठेगा। सेना का यह लांचर 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर शिव के पिनाक से क्‍यों चिंतित हैं पड़ोसी मुल्‍क। इसकी क्‍या मारक क्षमता है। इसकी क्‍या खूबियां हैं। भारतीय सेना के लिए यह वरदान कैसे और क्‍यों बना। इसकी किस क्षमता से सेना इतराती है।

पिनाक का यह अडवांस्ड वर्जन 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मनों के ठिकानों को पूरी तरह से ध्वस्त कर सकता है। यह लांचर किसी भी मौसम में फायर कर सकता है। अपने मल्टी बैरल के जरिए यह लांचर 44 सेकेंड में 72 राकेट दाग सकता है। रक्षा मामलों के जानकार डा अभिषेक प्रताप सिंह का कहना है कि डीआरडीओ ने पिनाक को अपनी सैन्‍य जरूरतों के लिहाज से विकसित किया है। इसके दायरे में पाकिस्‍तान के कई शहर शामिल हो सकते हैं। यह अन्‍य लांचारों की तरह भारी भरकम नहीं है। इसको आसानी से एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर ले जाया जा सकता है। किसी भी इलाके में यह सफल है। इसको लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से चलाना जितना आसान है उतना ही पाकिस्‍तान से सटे भारतीय सीमा से भी।

 यानी सेना का यह लांचर 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है। पिनाक शिव की धनुष की तरह ही विध्वंसक और अचूक है। इसी क्षमता के कारण इसका नाम पिनाक रखा गया। अडवांस्ड तकनीक से लैस यह लांचर अपने दुश्मनों को संभलने का तनिक भी मौका नहीं देता है। इसकी खास बात यह है कि हर मौसम और परिस्थिति में इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है। यह लांचर 44 सेकेंड में यह 72 राकेट दाग कर दुश्मनों के ठिकानों को ध्वस्त कर सकता है। यह दुश्‍मनों को संभलने का मौका नहीं देता है। इसका राजस्थान के पोखरण रेंज में कई सफल टेस्ट और किए गए हैं।

इसका निशाना अचूक है। इसकी इस क्षमता से दुश्‍मन सेना के हौसले पस्‍त हो जाते हैं। निशाना इतना सटीक कि दुश्मन का विनाश तय है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पोखरण रेंज में इस मिसाइल के कई परीक्षण किए हैं। इस टेस्ट के दौरान 24 राकेट अलग-अलग रेंज से फायर किए गए। इस दौरान इसने अपने लक्ष्य को बड़ी ही आसानी के साथ भेद दिया। पिनाक मल्टी बैरल राकेट लांचर सिस्टम को DRDO ने तैयार किया है। एक दशक पहले ही भारतीय सेना में शामिल पिनाक मिसाइल का अब उन्नत संस्करण तैयार किया गया है।

पिनाक इन्हांस्ड रेंज शुरुआती पिनाक का अडवांस्ड वर्जन है। जल्द ही इसका उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इस सिस्टम के सफल टेस्ट ने सेना को जमीन पर हमले का ज्यादा घातक विकल्प दे दिया है। इस हथियार से सेना दुश्मनों के ठिकानों को ध्वस्त कर सकता है। इस हथ‍ियार से चीन को करारा जवाब मिलेगा। गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा विवाद और हिंसक झड़प के बाद भारत अपनी सैन्य क्षमता में लगातार इजाफा कर रहा है। भारत अपने सैन्य उपकरणों को अत्याधुनिक बना रहा है। भारतीय सेना चीन की किसी भी हरकत से निपटने के लिए अब हर मोर्चे पर बड़ी तैयारी कर रहा है।

 इसके पूर्व पिनाक 44 सेकेंड में 12 राकेट दागने वाला मिसाइल लांचर सिस्टम था। इसकी मारक क्षमता महज 38 किमी तक थी। हालांकि अपग्रेड होने के बाद यह 44 सेकेंड में ताबड़तोड़ 72 राकेट दाग सकता है। वहीं यह 75 किलोमीटर दूरी तक सटीक निशाना लगा सकने में भी सक्षम है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने पिनाक मार्क-1 संस्करण का इस्तेमाल किया था। इसने पहाड़ की चौकियों पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को सटीकता के साथ निशाना बनाया था और युद्ध में दुश्मन को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था।

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