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जलवायु परिवर्तन और हिमालय में अनियोजित मानवीय हस्तक्षेप से बढ़ रहा आपदाओं का सिलसिला…

दुनिया में जलवायु परिवर्तन और हिमालय में अनियोजित मानवीय हस्तक्षेप से पहाड़ी क्षेत्रों में आपदाओं का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप आम लोगों को काफी नुकसान हुआ है। यही कारण है कि हाल ही में, अचानक आई बाढ़ ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अमरनाथ गुफा मंदिर के पास एक बेस कैंप को नष्ट कर दिया, जिसमें 15 तीर्थयात्री मारे गए थे। अब इसपर विशेषज्ञ ने लोगों और सरकार को चेताया है और कहा है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो परिणाम भयंकर हो सकते हैं।

आने वाले समय में बढ़ सकता है खतरा

दक्षिण एशिया नेटवर्क आन डैम्स, रिवर एंड पीपल (SANDRP) के समन्वयक हिमांशु ठक्कर के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के लिए खतरा पैदा किया है। और आने वाले समय में यह कई गुणा तेजी से विनाश ला सकता है। इसके चलते ही भूस्खलन, अचानक बाढ़ आना और बादल फटने जैसी घटनाएं अधिक विनाशकारी बनती जा रही है।

इन वजहों को विशेषज्ञ ने बताया कारण

ठक्कर ने कहा कि गैर-विचारित मानवीय हस्तक्षेपों जैसे बांधों, जल विद्युत परियोजनाओं, राजमार्गों, खनन, वनों की कटाई, भवन, अनियमित पर्यटन और तीर्थयात्रा के कारण पहाड़ों की नाजुकता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि हमारे पास हिमालय के लिए एक विश्वसनीय आपदा प्रबंधन प्रणाली भी नहीं है जिसके चलते नुकसान और बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

बता दें कि अगस्त 2018 में नीति आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में लगभग 50 प्रतिशत झरने सूख रहे हैं। भारत भर में पांच मिलियन झरने हैं, जिनमें से लगभग तीन मिलियन अकेले IHR में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 200 मिलियन से अधिक लोग झरनों पर निर्भर हैं, जिनमें से 5 करोड़ लोग क्षेत्र के 12 राज्यों में रहते हैं।

मणिपुर में भूस्खलन इसका बड़ा उदाहरण

दुनिया का छठा सबसे अधिक भूकंप संभावित क्षेत्र मणिपुर में 30 जून को हुए विशाल भूस्खलन ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को एकबार फिर से जीवंत कर दिया है। वहां के नोनी जिले में भूस्खलन से सैनिकों, रेलवे कर्मचारियों और ग्रामीणों सहित 56 लोगों की मौत हो गई थी।

विशेषज्ञ ने दिया यह सुझाव

विशेषज्ञ के अनुसार ग्लेशियर के नीचे की ओर 100-150 किमी तक हरित आवरण बनाए रखने की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अनियोजित निर्माण परियोजनाओं और अनियमित पर्यटन को बढ़ा रहा है।

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