भाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर इस बार राधा अष्टमी शनिवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि राधा अष्टमी के बिना जन्माष्टमी व्रत अधूरा है। इस व्रत से धन-धान्य, अखंड सौभाग्य और संतान सुख मिलता है। ब्रजमंडल में यह पर्व धूमधाम से मनता है। इसी दिन से 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत भी शुरू होगा, जो 3 अक्टूबर को पूरा होगा। प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन उत्तम माना गया है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है
19 सितंबर 2026 (शनिवार) को देशभर में राधा अष्टमी का पावन पर्व अपार श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी के प्राकट्य दिवस का यह उत्सव विशेषकर ब्रज क्षेत्र बरसाना, वृंदावन, और मथुरा में बड़े ही धूमधाम के साथ आयोजित किया जा रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि अष्टमी तिथि शनिवार दोपहर 03:26 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत शनिवार को होगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और अनुराधा नक्षत्र में राधा जी का प्राकट्य हुआ था। पूजन का उत्तम मुहूर्त मध्याह्न 10:47 से 01:13 बजे तक है। राधा अष्टमी तिथि का प्रारंभ 18 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे हुआ था, जो आज 19 सितंबर 2026 को दोपहर 3:26 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा रानी का पूजन मध्याह्न (दोपहर) काल में किया जाता है।
पूजा विधि और प्रिय भोगपूजा विधि
सुबह स्नान के उपरांत पूजा स्थान पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। दोपहर के समय पंचामृत से अभिषेक कर नए वस्त्र, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।
बरसाना और ब्रज मंडल में छाया उल्लास
बरसाना स्थित श्री लाडली जी मंदिर में सुबह से ही भक्तों का जनसैलाब उमड़ा हुआ है। तड़के महाअभिषेक के साथ राधा रानी का अलौकिक श्रृंगार किया गया। मंदिरों में बधाई गायन, हरिनाम संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हो रहा है।
राधा अष्टमी व्रत का महत्व
शास्त्रों में मान्यता है कि बिना राधा जी की कृपा के भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति अधूरी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने और निष्काम भाव से पूजन करने से घर में सुख, समृद्धि, शांति और अखंड सौभाग्य का वास होता है।
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