लखनऊ और कानपुर में संचालित ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को अब प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तार देने की तैयारी है। योगी सरकार इस सहकारी टैक्सी मॉडल को शहरों के साथ गांवों तक पहुंचाने की योजना बना रही है। इसके लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने का प्रस्ताव है। मॉडल में बाइक, ऑटो और कैब तीनों तरह की परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
चालक बनेंगे कारोबार के हिस्सेदार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तैयार किए जा रहे इस मॉडल में टैक्सी चालकों को कारोबार में हिस्सेदारी देने की अवधारणा है। जीरो कमीशन व्यवस्था के तहत चालक की प्रति यात्रा की कमाई से प्लेटफार्म कमीशन नहीं काटने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य चालकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़कर उन्हें कारोबार का हिस्सेदार बनाना है।
पीक टाइम में किराया नहीं बढ़ेगा
भारत टैक्सी की प्रस्तावित व्यवस्था में नो-सर्ज प्राइसिंग यात्रियों के लिए प्रमुख सुविधा होगी। मांग बढ़ने या पीक टाइम में किराये में अचानक वृद्धि नहीं करने का प्रावधान रखा गया है। इससे रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, एयरपोर्ट, अस्पताल और बाजार आदि तक आने-जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त परिवहन विकल्प मिल सकेगा।
गांवों में भी मिलेगा टैक्सी का विकल्प
सरकार की योजना टैक्सी सेवा को जिला मुख्यालयों तक सीमित रखने की नहीं है। पीएसीएस के माध्यम से इसे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी है। इससे गांवों से जिला मुख्यालय, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे तक आने-जाने के लिए स्थानीय स्तर पर परिवहन सुविधा का विकल्प बढ़ सकता है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में वाहन संचालन से जुड़े रोजगार के अवसर भी विकसित होने की संभावना है।
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