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स्टालिन जूनियर के ‘गंदे बोल’ पर भड़के CM विजय! विधानसभा में दी चेतावनी, बोले- ‘महिलाओं के अपमान पर कानून करेगा सीधा हिसाब’

अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर विपक्ष के नेता व DMK नेता उदयनिधि स्टालिन की कथित ‘दोहरे अर्थ (Double Meaning) वाली टिप्पणी’ को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस पूरे विवाद के बीच राज्य के मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार को विधानसभा में बिना नाम लिए उदयनिधि स्टालिन पर तीखा हमला बोला और स्पष्ट चेतावनी दी कि महिलाओं का अपमान करने वालों को कानून बख्शेगा नहीं। विधानसभा में स्टालिन जूनियर का नाम लिए बिना विजय ने कहा, “अभिव्यक्ति की आज़ादी – इसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है, इस पर हमें आत्म-मंथन करना चाहिए। साथ ही, हमारे लोगों या महिलाओं के बारे में अपमानजनक तरीके से बात करना, ऐसा नहीं होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “लोग देख रहे हैं कि कुछ लोग दोहरे अर्थ वाली बातें कर रहे हैं। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हम सभी के घरों में बहनें और माताएं हैं… इसलिए अगर महिलाओं का अपमान होता है, तो कानून अपनी कार्रवाई करेगा।” विजय की यह टिप्पणी उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी और बाद में ‘दोहरे अर्थ वाली’ टिप्पणियों से जुड़े मामले में स्टेशन बेल पर रिहाई के कुछ हफ़्ते बाद आई है। इन टिप्पणियों का मतलब व्यापक रूप से त्रिशा की ओर इशारा माना गया था, जो विजय की करीबी दोस्त हैं। यह विवाद 3 अगस्त को तंजावुर में कावेरी मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ, जब उदयनिधि स्टालिन के भाषण के समय समर्थकों ने त्रिशा का नाम लिया। वे रुके, मुस्कुराए और एक ऐसी टिप्पणी की जिसे आलोचकों ने त्रिशा के प्रति अश्लील इशारा माना। बाद में स्टालिन जूनियर ने किसी भी आपत्तिजनक टिप्पणी से इनकार किया और कहा कि वे केवल कावेरी मुद्दे का ज़िक्र कर रहे थे। पुलिस ने 4 अगस्त को चेन्नई स्थित उनके आवास से उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए तंजावुर ले गई। बाद में उसी दिन उन्हें स्टेशन बेल पर रिहा कर दिया गया। स्टालिन जूनियर ने विजय सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया और कहा कि उनका महिलाओं का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उदयनिधि स्टालिन का नाम लिए बिना, विजय ने उन राजनीतिक नेताओं पर भी निशाना साधा जो हद पार करने वाली टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने कहा, “अगर मैं राजनीतिक मकसद से बात कर रहा हूं तो मैं जिम्मेदार नहीं हूं। हमने देखा है कि इस विधानसभा में (पूर्व CM जे) जयललिता को कितने अपमान का सामना करना पड़ा है। मैं फिर से कहता हूं, राजनीतिक तौर पर कोई भी टिप्पणी करें और वह अभिव्यक्ति की आज़ादी है। लोग यह देख रहे हैं।”
‘पुलिस का काम सिर्फ़ गिरफ़्तारी करना नहीं है’
विजय ने कहा कि विकास के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है और पुलिस का काम सिर्फ़ आरोपियों को गिरफ़्तार करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “विकास तभी शुरू होता है जब कानून-व्यवस्था ठीक से बनी रहे। इसलिए, पुलिस फ़ोर्स सिर्फ़ अपराधियों को गिरफ़्तार करने के लिए नहीं है, बल्कि यह राज्य के विकास की नींव भी है।” विजय ने आगे कहा, “जो लोग कानून का पालन करते हैं, उनके लिए पुलिस दोस्त है और जो नहीं करते, उनके लिए दुश्मन।” उन्होंने कहा कि नेताओं और अधिकारियों को पुलिस के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैंने इस बात पर ज़ोर दिया है कि चाहे मुख्यमंत्री हों, मंत्री हों या कोई अधिकारी, वे पुलिस के मामलों में दखल नहीं दे सकते।” विजय ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि अलग-अलग अपराधों का मतलब अपने आप कानून-व्यवस्था का बिगड़ना होता है। उन्होंने कहा, “एक अपराध से कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का पता नहीं चलता। इसलिए, ये सभी अपराध पिछले 100 दिनों में नहीं हुए हैं।” उन्होंने कहा कि अपराध के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें लोगों का कानून का डर खत्म होना भी शामिल है।

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