विदेश मंत्री दो दिवसीय दौरे पर रूस पहुंचे हैं और इस दौरे के दौरान उन्होंने मॉस्को पहुंचते ही सबसे पहले राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से मुलाकात की। यह मुलाकात सिर्फ एक भेंट नहीं थी बल्कि इसमें भारत और रूस के भविष्य के आर्थिक रणनीतिक रिश्तों पर पूरा खाका तैयार किया गया। विदेश मंत्री जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश सौंपा। उन्होंने पुतिन को बताया कि पीएम मोदी आगामी एसईओ शिखर सम्मेलन और फिर भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनका स्वागत करने के लिए बेहद उत्सुक है। यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि 12 और 13 सितंबर को राष्ट्रपति पुतिन खुद नई दिल्ली आ सकते हैं और इस मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठकों को अंजाम देना शुरू किया और यह बैठकें भारत और रूस की द्विपक्षी संबंधों को बेहतर करने के लिए की जा रही हैं। इसी सिलसिले में विदेश मंत्री जयशंकर ने 27वें भारत रूस अंतर सरकारी आयोग की सह अध्यक्षता भी की और यहां पर जो आंकड़े निकल कर सामने आए वह हैरान करने वाले हैं। पिछले 5 सालों में भारत और रूस के बीच द्विपक्ष व्यापार चार गुना बढ़ गया है। साल 2021-22 में जो व्यापार 13 अरब डॉलर था वो साल 2025-26 में बढ़कर करीब $ अरब डॉलर तक पहुंच गया है। जो कि दिखाता है कि भारत और रूस की साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है। लेकिन यहां पर एक बड़ी चुनौती भी है जिसका सामना दोनों देश कर रहे हैं। जिसको लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि व्यापार असंतुलन यानी कि ट्रेड इमंबैलेंस का मुद्दा है जो दोनों देशों के बीच कुछ रुकावट ला सकता है। रूस से आयात तो बढ़ गया है लेकिन भारत का निर्यात उस अनुपात में नहीं है जिस से 50 अरब डॉलर का अंतर पैदा हो गया है। इस बात को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि असंतुलन को दूर करना अब भारत की प्राथमिकता है और इस बातचीत के दौरान ऊर्जा, परमाणु क्षेत्र और फर्टिलाइज़र्स पर विशेष जोर दिया गया। राष्ट्रपति पुतिन ने भी भरोसा दिलाया है कि रूस भारतीय किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए फर्टिलाइज़र्स की आपूर्ति बढ़ा रहा है और आगे भी इसे जारी रखेगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच पेमेंट मैकेनिज्म को लेकर भी मजबूत करने पर बातचीत हुई और मार्केट एक्सेस को आसान बनाने पर काम करने पर सहमति बनी है। आप एक बार खुद देखिए कि विदेश मंत्री ने इस बैठक में क्या कुछ कहा है। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तीन मुख्य प्रस्ताव रखे हैं। जो पहला प्रस्ताव है वो है परिणामों पर जोर। अब सिर्फ बैठकों से काम नहीं हो सकता। आगे देखना होगा कि हर वर्किंग ग्रुप को ठोस नतीजे देने होंगे। दूसरा बड़ा प्रस्ताव था बिजनेस कनेक्ट। सरकारों का काम माहौल बनाना है। लेकिन जो असली व्यापार है वह व्यापार कंपनियां करती है। इसलिए व्यापारियों को भी सीधा जोड़ने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जोर दिया और तीसरा है नए अवसर। यानी कि बदलते हुए वैश्विक हालात में नए क्षेत्र जैसे कि स्किल मोबिलिटी,नई टेक्नोलॉजी इन सारे क्षेत्रों में नई-नई संभावनाओं को तलाशने पर भी दोनों देशों को जोर देना होगा।
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