खरीफ सीजन में किसानों को खाद की परेशानी न हो, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उर्वरक वितरण व्यवस्था की निगरानी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है और किसी भी किसान को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी फसल की जरूरत और कृषि विशेषज्ञों की संस्तुति के अनुसार समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। साथ ही वितरण व्यवस्था में आने वाली तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने को कहा गया है।
खाद की कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा खाद का भंडारण न करें। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार प्रदेश में अधिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। सरकार ने साफ किया है कि खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी या किसानों के शोषण की शिकायत मिलने पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग को प्रदेश के सभी 18 मंडलों में उर्वरक उपलब्धता की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में 29.05 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के अनुसार खरीफ सीजन-2026 में 27 जुलाई तक प्रदेश में 28.25 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हो चुकी है, जबकि अभी भी 29.05 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।
आंकड़ों के अनुसार
यूरिया 20.47 लाख मीट्रिक टन वितरण, 14.77 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध
डीएपी: 3.96 लाख मीट्रिक टन वितरण, 4.81 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध
एनपीके: 1.43 लाख मीट्रिक टन बिक्री, 4.90 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध
एसएसपी: 2.15 लाख मीट्रिक टन बिक्री, 3.46 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध
एमओपी: 0.24 लाख मीट्रिक टन बिक्री, 1.11 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध
कानपुर और लखनऊ मंडल में सबसे ज्यादा यूरिया
कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में पर्याप्त मात्रा में खाद मौजूद है। मंडलवार उपलब्ध यूरिया में कानपुर मंडल 1,43,076 मीट्रिक टन और लखनऊ मंडल 1,38,186 मीट्रिक टन के साथ सबसे आगे हैं। इसके अलावा बरेली में 1,16,987, प्रयागराज में 1,11,070, वाराणसी में 1,09,312, आगरा में 95,852 और गोरखपुर में 91,659 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है।सरकार ने किसानों से कहा है कि खाद से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए वे जिला और मंडल स्तर के कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
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