Friday , July 24 2026

इसी दिन संविधान सभा ने अपनाया था भारत का तिरंगा, जानिए राष्ट्रीय ध्वज की पूरी कहानी

भारत के राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ा 22 जुलाई का दिन इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगे को औपचारिक रूप से अपनाया था। यह निर्णय देश की आजादी से कुछ सप्ताह पहले लिया गया, जिसने स्वतंत्र भारत की पहचान को एक नया स्वरूप दिया। दिल्ली स्थित संविधान सभा (कांस्टिट्यूशनल हॉल) में हुई बैठक में राष्ट्रीय ध्वज को लेकर प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। विस्तृत चर्चा के बाद केसरिया, सफेद और हरे रंग वाले ध्वज को कुछ आवश्यक बदलावों के साथ भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया।
पिंगली वेंकैया ने तैयार की थी तिरंगे की मूल रूपरेखा
भारत के वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज की मूल अवधारणा का श्रेय स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया को दिया जाता है। उनके प्रारंभिक डिजाइन में लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं, जो उस समय भारत के प्रमुख धार्मिक समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थीं। साल 1921 में जब पिंगली वेंकैया अपने डिजाइन के साथ महात्मा गांधी के पास पहुंचे, तब गांधीजी ने इसमें सफेद रंग और चरखे को शामिल करने का सुझाव दिया। सफेद रंग अन्य समुदायों तथा शांति का प्रतीक माना गया, जबकि चरखा स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भरता का संदेश देता था।
1923 में आंदोलन के दौरान पहली बार व्यापक रूप से दिखा तिरंगा
वर्ष 1923 में नागपुर में हुए एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान इस ध्वज का व्यापक रूप से उपयोग किया गया। बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसी ध्वज का इस्तेमाल किया।
आजादी के बाद लंबे समय तक राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम सीमित थे और आम नागरिक केवल राष्ट्रीय पर्वों पर ही इसे फहरा सकते थे।
2002 में बदला फ्लैग कोड, हर नागरिक को मिला अधिकार
साल 2002 में भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) में संशोधन किया गया। इसके बाद प्रत्येक भारतीय नागरिक को सम्मानपूर्वक किसी भी दिन अपने घर, कार्यालय, प्रतिष्ठान या अन्य स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार मिल गया। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के दौरान ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने पूरे देश में तिरंगे के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊंचाई दी।
तिरंगे के तीन रंग और अशोक चक्र का संदेश
भारत के राष्ट्रीय ध्वज का प्रत्येक रंग और उसके मध्य स्थित अशोक चक्र विशेष अर्थ रखता है—
केसरिया – साहस, त्याग और राष्ट्रसेवा का प्रतीक।
सफेद – सत्य, शांति और पारदर्शिता का संदेश।
हरा – समृद्धि, विकास और प्रकृति का प्रतीक।
अशोक चक्र – 24 तीलियों वाला धर्मचक्र, जो निरंतर प्रगति, न्याय और गतिशीलता का प्रतीक माना जाता है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com