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रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अमेरिका का नया दबाव! सीनेट में प्रतिबंध विधेयक पेश, 100% तक टैरिफ का प्रस्ताव

अमेरिका की सीनेट में रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़ा बहुप्रतीक्षित विधेयक पेश किया गया है। इस संशोधित प्रस्ताव में भारत, चीन समेत पांच देशों का उल्लेख किया गया है, जो रूस से तेल की खरीद जारी रखने की स्थिति में टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं। कई सांसद इस प्रस्ताव को “लिंडसे ग्राहम रूस अकाउंटेबिलिटी बिल” के नाम से भी संबोधित कर रहे हैं।
मंगलवार को कैपिटल हिल में यह विधेयक डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन के साथ रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर, केटी ब्रिट तथा दोनों दलों के एक दर्जन से अधिक सांसदों ने संयुक्त रूप से पेश किया।
लिंडसे ग्राहम की पहल पर तैयार हुआ विधेयक
सांसदों के अनुसार, इस विधेयक की रूपरेखा तैयार करने में दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की अहम भूमिका रही। उन्होंने लगभग दो वर्षों तक इस प्रस्ताव पर काम किया था। शुरुआती मसौदे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का सुझाव दिया गया था।
हालांकि संशोधित संस्करण में इस अधिकतम सीमा को घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है।
सिर्फ टैरिफ नहीं, रूस की अर्थव्यवस्था पर भी कड़ा प्रहार
मुख्य डेमोक्रेटिक प्रायोजक रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह विधेयक केवल आयात शुल्क तक सीमित नहीं है। इसमें रूस की ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा व्यवस्था, रूसी उद्योगपतियों तथा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान शामिल है।
साथ ही अमेरिकी प्रशासन को रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाले देशों पर निर्धारित सीमा तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव रखा गया है।
भारत समेत पांच देश दायरे में
संशोधित विधेयक के अनुसार, रूस से तेल खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों पर यह प्रावधान लागू हो सकता है। ब्लूमेंथल के मुताबिक इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। इसके अलावा रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों को भी इस दायरे में लाने का प्रस्ताव है। हालांकि जिन देशों का रूस से गैस आयात उनकी कुल जरूरत का 15 प्रतिशत से कम है और जो आयात घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट देने का प्रावधान रखा गया है।
टैरिफ की अंतिम दर कौन तय करेगा?
विधेयक में टैरिफ की निश्चित दर तय नहीं की गई है। इसके बजाय अंतिम दर निर्धारित करने का अधिकार अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (U.S. Trade Representative) को दिया जाएगा।
ब्लूमेंथल ने कहा कि उनका उद्देश्य ऐसी दर तय करना है जिससे भारत, चीन और रूस से तेल एवं गैस खरीदने वाले अन्य देशों को इस व्यापार से हतोत्साहित किया जा सके।
राष्ट्रपति ट्रंप को मिलेगी विशेष छूट देने की शक्ति
प्रस्ताव में राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। यदि बाद में शुल्क में कमी की जाती है तो इसकी जानकारी कांग्रेस को देना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” यानी उन तेल टैंकरों पर कार्रवाई का भी प्रावधान जोड़ा गया है, जिनका उपयोग मौजूदा प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात के लिए किया जाता है।
पहले के मुकाबले सीमित किया गया दायरा
सांसदों ने बताया कि पहले के मसौदे में लगभग 63 देशों को टैरिफ के दायरे में लाने का प्रस्ताव था। संशोधित संस्करण में इसे सीमित कर केवल रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों तक रखा गया है।
ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बदलाव ट्रंप प्रशासन के सुझाव पर किया गया है और प्रशासन ने इस संशोधित मसौदे का लिखित समर्थन भी दिया है।
लिंडसे ग्राहम को दी गई श्रद्धांजलि
विधेयक पेश किए जाने के दौरान कई सीनेटरों ने लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि अर्पित की। रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर ने इसे ग्राहम की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में से एक बताया।
सीनेटर टेड क्रूज ने कहा कि ग्राहम ने निधन से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस विधेयक की शर्तों पर सीधे चर्चा की थी। सांसदों ने इसे जल्द पारित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भारत पर दबाव क्यों बढ़ा?
2022 के बाद से भारत ने रियायती दरों पर रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। वर्तमान में रूसी तेल भारत के कुल आयात का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
भारत का लगातार कहना रहा है कि यह खरीदारी देश की ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों के लिए जरूरी है। नई दिल्ली का यह भी तर्क है कि इससे वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
अभी लंबी है विधायी प्रक्रिया
यह विधेयक फिलहाल अमेरिकी सीनेट की प्रक्रिया में है। इसके बाद इसे प्रतिनिधि सभा से भी पारित होना होगा। दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। इससे पहले व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने एएनआई से कहा था कि ट्रंप प्रशासन इस रूस प्रतिबंध विधेयक का समर्थन करता है।

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