देश में तेजी से बढ़ रहे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) क्षेत्र में सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने IVF क्लीनिकों, ART केंद्रों और गैमीट (शुक्राणु एवं अंडाणु) बैंकों से जुड़े मौजूदा नियामक ढांचे और कानूनों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। एनसीडब्ल्यू की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश आशा मेनन करेंगी। समिति का उद्देश्य महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा, उनकी गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ मौजूदा नियमों का व्यापक मूल्यांकन करना है।
कई क्षेत्रों के विशेषज्ञ होंगे शामिल
समिति में न्यायपालिका, चिकित्सा, फोरेंसिक विज्ञान, कानून प्रवर्तन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, लोक नीति तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति के प्रमुख सदस्यों में पूर्व आईपीएस अधिकारी सुंदरी नंदा, राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य अर्चना मजूमदार, एनसीडब्ल्यू की सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. शिप्रा धर, वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी, सफदरजंग अस्पताल के डॉ. सर्वेश टंडन, एम्स की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीता सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नयना सहस्रबुद्धे, FOGSI के डॉ. रजनीकांत, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एआरटी प्रभाग के नामित प्रतिनिधि तथा एनसीडब्ल्यू की वरिष्ठ समन्वयक कंचन खट्टर शामिल हैं।
महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर रहेगा फोकस
आयोग का कहना है कि समिति मौजूदा कानूनों और नियामक व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुझाव देगी, ताकि IVF और ART सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़े और महिलाओं के अधिकारों व सुरक्षा को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके।
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