उत्तर प्रदेश में मानसून ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को प्रदेश के 49 जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले पांच दिनों तक मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा और कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका बनी रहेगी। पिछले 48 घंटे में बारिश से जुड़े हादसों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार बंगाल की खाड़ी से बना मानसूनी सिस्टम मध्य प्रदेश तक पहुंच चुका है, जिसका असर पूरे उत्तर प्रदेश पर पड़ रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार वर्षा हो रही है और फिलहाल राहत के आसार नहीं हैं। बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।लखनऊ में रातभर बारिश होती रही, जबकि वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज, हापुड़, बांदा, प्रतापगढ़, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर समेत अनेक जिलों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित रहा। सहारनपुर में कब्रिस्तान की मिट्टी बहने, मुजफ्फरनगर में नहर टूटने, बिजनौर में स्कूल की दीवार गिरने और प्रयागराज में जलभराव के कारण वाहन नाले में गिरने जैसी घटनाएं सामने आईं। लगातार बारिश जानलेवा भी साबित हो रही है। भारी बारिश को देखते हुए मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुरादाबाद सहित कई जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
मुख्यमंत्री योगी ने जारी किए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने, जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी रखने और प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने बारिश और आकाशीय बिजली की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही निचले इलाकों में जलनिकासी, राहत शिविरों, सुरक्षित आवागमन और संवेदनशील क्षेत्रों में सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं।\
अब तक सामान्य से 17% कम बारिश
मौसम विभाग के अनुसार 10 जुलाई तक प्रदेश में 140.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 169.4 मिमी होनी चाहिए थी। यानी अब भी करीब 17 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। हालांकि पिछले दो दिनों की तेज बारिश से यह अंतर तेजी से कम होने की संभावना है।
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