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Shyama Prasad Mukherjee Birth Anniversary Special: वह ऐतिहासिक कहानी, जब उन्होंने ‘आधा पंजाब और आधा बंगाल’ भारत के लिए बचा लिया

भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी और महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारतीय राजनीति और इतिहास में एक विशिष्ट स्थान है। आज 6 जुलाई का दिन देश के इतिहास में बेहद खास है, क्योंकि आज ही के दिन (6 जुलाई 1901) को कोलकाता में इस महान विभूति का जन्म हुआ था। उनकी जयंती के इस विशेष अवसर पर, आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी एक ऐसी ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कहानी, जिसने भारत के भूगोल और अखंडता को हमेशा के लिए बदल दिया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती विशेष: वह ऐतिहासिक कहानी, जब उन्होंने ‘आधा पंजाब और आधा बंगाल’ भारत के लिए बचा लिया डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को आज अधिकांश लोग कश्मीर के पूर्ण विलय के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्ष के लिए याद करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यदि आज पश्चिम बंगाल और पंजाब भारत का हिस्सा हैं, तो इसके पीछे डॉ. मुखर्जी की अद्भुत दूरदर्शिता और अटूट इच्छाशक्ति थी। यह कहानी साल 1946-47 के विभाजन के उस दौर की है, जब भारत का भविष्य तय हो रहा था।
जिन्ना की पूरी बंगाल पर थी नजर
साल 1947 में जब लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के विभाजन की योजना (थ्री जून प्लान) सामने रखी, तो मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना की मांग थी कि पूरे बंगाल और पूरे पंजाब को पाकिस्तान में शामिल किया जाए।
उस समय बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री एच. एस. सुहरावर्दी और कुछ अन्य नेता मिलकर एक ‘स्वतंत्र और संयुक्त बंगाल’ (United Bengal) का प्रस्ताव ला रहे थे, जो न भारत का हिस्सा होता और न पाकिस्तान का। लेकिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस कूटनीतिक चाल को समझ गए थे। उन्हें आभास था कि एक बार बंगाल भारत से अलग हुआ, तो वहां रहने वाले लाखों हिंदुओं और अल्पसंख्यकों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और अंततः वह हिस्सा पाकिस्तान में मिला लिया जाएगा।

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