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1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होने का दावा गलत, नितिन गड़करी ने किए 10 बड़े दावे

देश में E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही भ्रामक जानकारियों के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कहा कि E20 कार्यक्रम को लेकर कई तरह के झूठे और भ्रामक दावे किए जा रहे हैं, जबकि यह पूरी योजना वैज्ञानिक शोध, वैश्विक अनुभव और नियामकीय सुरक्षा मानकों पर आधारित है। मंत्रालय ने 10 प्रमुख बिंदुओं के जरिए E20 पेट्रोल से जुड़े वायरल दावों का जवाब दिया और बताया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया पूरी तरह तय मानकों के अनुसार अपनाई जा रही है।
1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होने का दावा गलत
सरकार ने उस वायरल दावे को पूरी तरह खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है। मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में प्रति लीटर केवल लगभग 3 से 5 लीटर प्रसंस्कृत पानी का उपयोग होता है। आधुनिक डिस्टिलरी में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक अपनाई जा रही है, जिससे पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल वही अतिरिक्त चावल उपयोग में लाया जाता है जो देश की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद बचता है। साथ ही अब एथेनॉल उत्पादन में मक्का के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि इसकी खेती में धान की तुलना में कम पानी लगता है।
ARAI के ट्रायल में इंजन पर नहीं मिला बड़ा नकारात्मक असर
वाहनों पर E20 पेट्रोल के प्रभाव को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय के मुताबिक भारतीय वाहन अनुसंधान संघ (ARAI) ने कारों पर लगभग 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर करीब 20,000 किलोमीटर तक परीक्षण किए। इन परीक्षणों में वाहन के प्रदर्शन या इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया। हालांकि माइलेज में कुछ सीमित बदलाव जरूर दर्ज किए गए।
कई देशों में पहले से इस्तेमाल हो रहा है E20 और एथेनॉल मिश्रित ईंधन
सरकार ने बताया कि अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान और कई यूरोपीय देशों में लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। इंजन खराब होने, वारंटी समाप्त होने या बीमा अमान्य होने जैसे दावों को भी मंत्रालय ने गलत बताया। सरकार के अनुसार, E20 के अनुरूप तैयार किए गए वाहनों की वारंटी और बीमा पूरी तरह वैध रहते हैं।
इंजन खराब होने और जंग लगने के दावों पर भी सरकार का जवाब
सोशल मीडिया पर वायरल उन पोस्टों को भी सरकार ने भ्रामक बताया, जिनमें कहा गया था कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या वाहन के पुर्जों में जंग लगने लगती है। मंत्रालय ने बताया कि ARAI ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के साथ मिलकर विस्तृत अध्ययन किया है, जिसमें ऐसे दावों की पुष्टि नहीं हुई।
फ्यूल टैंक में पानी जाने और गन्ने का रस मिलाने वाले दावे भी निकले फर्जी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल से वाहन के फ्यूल टैंक में पानी जाने का दावा पूरी तरह निराधार है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल उन वीडियो को भी मनगढ़ंत बताया गया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि ईंधन में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल औद्योगिक प्रक्रियाओं के जरिए तैयार किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट में E20 नीति नहीं, अनुबंध संबंधी मामला था
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल में उच्चतम न्यायालय में हुई सुनवाई E20 कार्यक्रम की वैज्ञानिक उपयोगिता पर नहीं थी, बल्कि एथेनॉल आपूर्ति और अनुबंध से जुड़े मामलों से संबंधित थी। इसलिए इसे E20 नीति पर सवाल के रूप में पेश करना गलत है। केंद्र सरकार का कहना है कि E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक और प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करें तथा भ्रामक संदेशों से बचें।

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