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सैन्य खर्च में भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा देश, परमाणु हथियारों की रेस में भी पाकिस्तान से आगे

अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (सिपरी) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में वैश्विक रक्षा बजट और परमाणु हथियारों को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वर्ष 2025 में 92.1 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 7.6 लाख करोड़ रुपये) के भारी-भरकम रक्षा बजट के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। रिपोर्ट में पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे गंभीर सैन्य तनाव और दोनों देशों की रणनीतिक तैयारियों का भी खास तौर पर जिक्र किया गया है।
परमाणु ताकत में भारत आगे, चीन को टक्कर देने पर फोकस
सिपरी के आकलन के मुताबिक, जनवरी 2026 की शुरुआत तक भारत के पास परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़कर लगभग 190 हो गया है, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान के पास अनुमानित 170 परमाणु हथियार हैं।
भारत ने साल 2025 में अपने परमाणु भंडार को थोड़ा और मजबूत किया है और लगातार नई मिसाइल प्रणालियों का विकास कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब अपनी सेना के आधुनिकीकरण (Modernization) के तहत ऐसे लॉन्ग-रेंज हथियारों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जो पूरे चीन को अपनी जद में ले सकें। हालांकि, पाकिस्तान के साथ पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां भी भारत की रणनीतियों के केंद्र में बनी हुई हैं।
पाकिस्तान भी बढ़ा रहा है अपनी ताकत
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भी 2025 में नए वेपन सिस्टम और परमाणु सामग्री (Fissile Material) को इकट्ठा करना जारी रखा है। अनुमान लगाया गया है कि आने वाले 10 सालों में पाकिस्तान का परमाणु भंडार भी तेजी से बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में मई 2025 के उस संक्षिप्त सैन्य संकट का भी हवाला दिया गया है, जब भारत ने पाकिस्तान के हवाई और मिसाइल ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी। उस समय तनाव के परमाणु स्तर तक पहुंचने की आशंका बन गई थी, लेकिन दोनों ही देशों ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को काबू में कर लिया था।
दुनिया में कुल कितने परमाणु हथियार हैं?
सिपरी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत तक दुनिया की 9 महाशक्तियों (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल) के पास मिलाकर कुल 12,187 परमाणु हथियार मौजूद हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि साल 2025 में हुए कई क्षेत्रीय टकरावों में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ ‘साइबर वॉरफेयर’ (Cyber Operations) का इस्तेमाल भी काफी तेजी से बढ़ा है।

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