उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक और प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। प्रदेश के 38 जिलों के 9,356 विद्यालयों में साइंस किट उपलब्ध कराकर सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा मिल सके। इन साइंस किटों के माध्यम से अब सरकारी स्कूलों के छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि प्रयोग और गतिविधियों के जरिए विज्ञान को समझ सकेंगे। सरकार का मानना है कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार क्षमता विकसित करने के लिए प्रयोग आधारित शिक्षण बेहद जरूरी है। प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में साइंस किटें भेजी गई हैं। गोंडा में 370, शाहजहांपुर में 366, आगरा में 357, उन्नाव में 338, बुलंदशहर में 314 और अलीगढ़ में 301 साइंस किटों की आपूर्ति की गई है। वहीं लखीमपुर खीरी में 464 और सीतापुर में 469 साइंस किटें पहुंचाई गई हैं। सरकार पहले से ही मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, स्कूल कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी योजनाओं के जरिए सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने में जुटी है। अब साइंस किटों की उपलब्धता से विज्ञान शिक्षा को भी अधिक व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में तेजी आई है। इस पहल की खास बात यह है कि साइंस किटों की आपूर्ति आईआईटी गांधीनगर के माध्यम से कराई गई है। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी प्रयोगशाला आधारित शिक्षा का अनुभव मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य है कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाला कोई भी बच्चा संसाधनों और सीखने के अवसरों के मामले में पीछे न रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से भविष्य में बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी और नवाचार की नई संभावनाएं विकसित होंगी।
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