मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर व्यापक बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन को प्राथमिकता देते हुए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनसे लाखों महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। सरकार के प्रयासों से एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’, ‘सामूहिक विवाह योजना’, ‘लखपति दीदी योजना’ और ‘महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना’ जैसी पहलें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। बेटियों के लिए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत 2.85 करोड़ से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक किया गया, जबकि 5.20 लाख से अधिक बेटियों का विवाह सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से संपन्न कराया गया। वहीं 26.81 लाख बेटियां कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित हुई हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में बीसी सखी योजना मील का पत्थर साबित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने इसके तहत 42,711 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया है। इसके अलावा हजारों ‘विद्युत सखियों’ ने बिजली बिल कलेक्शन के जरिए आय अर्जित की है। औद्योगिक क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति और सुरक्षित माहौल के चलते महिला श्रम भागीदारी 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत किया है। निराश्रित महिलाओं की पेंशन 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये की गई है, जबकि हेल्पलाइन 181 के जरिए 8.42 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है।
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