ईरान की पहाड़ियों में मार गिराए गए अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल के वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) को बचाने का मिशन सिर्फ अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह आधुनिक सैन्य इतिहास में इज़राइल और अमेरिका के बीच अब तक के सबसे गहरे सहयोग की मिसाल भी बना। 48 घंटों तक मौत से जूझ रहे अमेरिकी कर्नल को बचाने के लिए इज़राइली स्पेशल फोर्सेज और इंटेलिजेंस ने जो किया, उसने इस मिशन की सफलता सुनिश्चित की। यह सब एक बहुत ही बारीकी से की गई प्लानिंग के बाद ही मुमकिन हो पाया, जिसमें सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) द्वारा चलाया गया एक “धोखा देने वाला अभियान” (deception campaign) भी शामिल था। अब, इस “साहसी” बचाव अभियान के बारे में नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस अभियान में अमेरिकी सेना को इज़राइल का भी साथ मिला। द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने US सेना के “सहयोग” से काम किया और ईरान के ठिकानों पर कई हमले किए। सूत्रों के हवाले से, इज़राइली मीडिया आउटलेट ने बताया कि ये हमले एक “ध्यान भटकाने वाले कदम” (diversion) के तौर पर किए गए थे, ताकि ईरानियों को विमान गिरने की जगह और दूसरे इलाकों से दूर रखा जा सके।
रिपोर्ट मे कहा गया है कि IDF का मुख्य मकसद यह पक्का करना था कि गिराए गए क्रू मेंबर तक पहुँचने की ईरान की कोशिश “नाकाम और बाधित” हो जाए। एक अधिकारी ने आउटलेट को बताया कि इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करने में इज़राइली इंटेलिजेंस ने अहम भूमिका निभाई।
द जेरूसलम पोस्ट ने एक इज़राइली सैन्य अधिकारी के हवाले से कहा, “यह US का बचाव अभियान था; उन्होंने वह कर दिखाया जिसका कई लोगों को डर था कि शायद न हो पाए। इज़राइल ने वह सब किया जो वह कर सकता था और जो US सेना ने उसे मदद करने और जान बचाने के लिए करने को कहा था।”
इज़राइली स्पेशल फोर्सेज की भागीदारी
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइली स्पेशल फोर्सेज ने भी इस बचाव अभियान में हिस्सा लिया। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सायेरेट मतकल और शालदाग इस मिशन में शामिल थे और उन्होंने उस इलाके में ईरान के खतरों का मुकाबला करने में US सेना की मदद की।
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