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BHAVYA योजना से मिलेंगे लाखों रोजगार, हाईवे, हाइड्रो पावर और MSP पर भी हुआ बड़ा फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिये। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक संवाददाता सम्मेलन में सरकार के इन फैसलों की जानकारी दी। देखा जाये तो देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने और आत्मनिर्भर भारत के सपने को जमीन पर उतारने के लिए मोदी सरकार ने एक साथ कई बड़े और निर्णायक फैसले लेकर यह साफ कर दिया है कि अब विकास केवल नारा नहीं बल्कि ठोस रणनीति बन चुका है। उद्योग, ऊर्जा, आधारभूत संरचना और किसानों के हितों को एक साथ साधने वाली यह श्रृंखला देश की दिशा बदलने की ताकत रखती है। सबसे बड़ा और सबसे असरदार फैसला है भारत औद्योगिक विकास योजना अर्थात भव्य का शुभारंभ। तैंतीस हजार छह सौ साठ करोड़ रुपये के भारी भरकम निवेश से देशभर में सौ प्लग एंड प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। यह सिर्फ जमीन पर फैक्टरी लगाने की योजना नहीं है बल्कि उद्योगों के लिए तैयार मंच देने की क्रांति है। अब निवेशक को अनुमति, जमीन, बिजली, पानी और ढांचे के लिए दर दर नहीं भटकना होगा। सब कुछ पहले से तैयार मिलेगा और उद्योग सीधे उत्पादन शुरू कर सकेगा। यह योजना राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से लागू होगी और एक नई प्रतिस्पर्धा पैदा करेगी जिसमें वही राज्य आगे आएंगे जो सुधार और निवेश के लिए तैयार होंगे। एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक की सहायता के साथ तैयार कारखाना शेड, गोदाम, परीक्षण प्रयोगशाला और श्रमिक आवास जैसी सुविधाएं उद्योगों को नई ताकत देंगी। यह कदम न केवल रोजगार का विस्फोट करेगा बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में निर्णायक मोड़ साबित होगा। इसके अलावा, ऊर्जा के मोर्चे पर भी सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि अब विकास और पर्यावरण साथ साथ चलेंगे। छोटी जल विद्युत परियोजना के तहत दो हजार पांच सौ चौरासी करोड़ रुपये खर्च कर पंद्रह सौ मेगावाट क्षमता विकसित की जाएगी। खास बात यह है कि यह परियोजनाएं पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में लगेंगी जहां अब तक विकास की गति धीमी रही है। इन परियोजनाओं से न केवल स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी बल्कि दूरदराज के इलाकों में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्माण के दौरान 51 लाख व्यक्ति दिवस रोजगार और लंबे समय तक संचालन में रोजगार का स्थायी स्रोत तैयार होगा। यह योजना बिना बड़े विस्थापन और पर्यावरणीय नुकसान के विकास का नया मॉडल पेश करती है। इसके साथ ही सड़क और संपर्क के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा दांव खेला है। उत्तर प्रदेश में बाराबंकी से बहराइच तक चार लेन नियंत्रित राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दी गई है जिस पर लगभग छह हजार नौ सौ उनहत्तर करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह परियोजना केवल सड़क नहीं बल्कि आर्थिक धमनी साबित होगी। तेज रफ्तार, कम समय, कम ईंधन खर्च और बेहतर सुरक्षा के साथ यह मार्ग नेपाल सीमा तक व्यापार और आवाजाही को नई गति देगा। रुपईडीहा भूमि बंदरगाह तक पहुंच आसान होगी और कृषि व्यापार, पर्यटन तथा सीमापार कारोबार में उछाल आएगा। यह परियोजना लाखों व्यक्ति दिवस रोजगार पैदा करेगी और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई जान देगी। इसके अलावा, किसानों के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कपास किसानों को सीधी राहत देने के लिए सत्रह सौ अठारह करोड़ रुपये से अधिक की सहायता को मंजूरी दी गई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था के तहत कपास निगम किसानों से सीधे खरीद करेगा ताकि बाजार में गिरते दाम के कारण किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। हम आपको बता दें कि करीब साठ लाख किसानों और उनसे जुड़े करोड़ों लोगों की आजीविका कपास पर निर्भर है। ऐसे में यह फैसला केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि किसानों के भरोसे को मजबूत करने वाला कदम है। देश में ग्यारह प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों के एक सौ बावन जिलों में पांच सौ आठ खरीद केंद्रों के जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि किसान को अपनी उपज बेचने के लिए परेशान न होना पड़े। इन सभी फैसलों को एक साथ देखा जाए तो तस्वीर बिल्कुल साफ नजर आती है। एक तरफ उद्योग को गति, दूसरी तरफ ऊर्जा को मजबूती, तीसरी तरफ सड़कों से जुड़ाव और चौथी तरफ किसानों को सुरक्षा। यही समन्वित विकास मॉडल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की असली कुंजी है। सरकार का यह आक्रामक विकास एजेंडा दिखाता है कि अब लक्ष्य छोटे नहीं हैं। रोजगार, निवेश, निर्यात और आत्मनिर्भरता को एक साथ साधने की यह रणनीति अगर जमीन पर पूरी ताकत से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

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