Thursday , February 19 2026

मोहम्मद यूनुस ने जाते-जाते दिखाया भारत को ‘सेवन सिस्टर्स’ का लालच! विदाई भाषण में उठाए बड़े सवाल

बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने अंतिम राष्ट्र संबोधन में 18 महीने के कार्यकाल की उपलब्धियों का दावा करते हुए देश की विदेश नीति में बड़े बदलाव की बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब बांग्लादेश किसी अन्य देश के इशारों पर नहीं चलता, बल्कि पूरी तरह आत्मविश्वासी, स्वतंत्र और गरिमापूर्ण

रुख अपनाता है।
यूनुस ने ‘सेवन सिस्टर्स’ का जिक्र कर उठाए सवाल
अपने टीवी पर प्रसारित संबोधन में यूनुस ने बांग्लादेश के समुद्री तटों को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का मजबूत माध्यम बताया। उन्होंने नेपाल, भूटान और ‘सेवन सिस्टर्स’ (भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्य) को साथ जोड़ते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अपार आर्थिक संभावनाएं हैं। उन्होंने बांग्लादेश के बंदरगाहों को अंतरराष्ट्रीय स्तर

पर कुशल बनाने के प्रयासों का जिक्र किया और दावा किया कि बेहतर कनेक्टिविटी से यह क्षेत्र वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन सकता है।
हालांकि उन्होंने भारत का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन ‘सेवन सिस्टर्स’ शब्द का इस्तेमाल करके पूर्वोत्तर राज्यों को नेपाल-भूटान जैसे स्वतंत्र देशों के साथ एक समान आर्थिक इकाई के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, जो क्षेत्र की भौगोलिक और आर्थिक पहचान को

अलग नजरिए से पेश करने की कोशिश दिखाती है।
पूर्वोत्तर राज्यों की चुनौतियां और बांग्लादेश की भूमिका
भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्य—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा—समुद्र से दूर हैं और सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के जरिए मुख्य भूमि से जुड़े हैं। यूनुस ने इनकी लैंडलॉक्ड स्थिति का फायदा उठाते हुए बांग्लादेश को इनके लिए समुद्री पहुंच का प्रमुख माध्यम बताया, जिससे वे

वैश्विक व्यापार से बेहतर जुड़ सकें।
बांग्लादेश अब ‘दब्बू’ नहीं: यूनुस का दावा
यूनुस ने अपने कार्यकाल को बांग्लादेश की विदेश नीति के लिए टर्निंग पॉइंट बताया। उन्होंने कहा, “हमने संप्रभुता, राष्ट्रीय हित और गरिमा को मजबूत किया है। आज का बांग्लादेश आत्मविश्वास से भरा है, जो अपने स्वतंत्र हितों की रक्षा करने में सक्षम और जिम्मेदार है।” उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के दौर की विदेश

नीति पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए इसे ‘निर्भर’ और ‘निर्देशों पर आधारित’ करार दिया।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर
यूनुस के कार्यकाल में ढाका और नई दिल्ली के बीच तनाव बढ़ा, खासकर अल्पसंख्यकों (विशेषकर हिंदुओं) पर हमलों और राजनीतिक मुद्दों को लेकर। व्यापारिक रिश्तों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा। यूनुस के इस अंतिम संबोधन से साफ है कि वे बांग्लादेश को एक मजबूत, स्वतंत्र खिलाड़ी के रूप में पेश करना

चाहते थे, लेकिन ‘सेवन सिस्टर्स’ का जिक्र भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com