अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तेहरान जल्द ही परमाणु समझौते के लिए बातचीत नहीं करता, तो अगला हमला पिछले मुकाबलों से बहुत अधिक गंभीर होगा। उन्होंने इसे अब तक का सबसे बड़ा हमला करार दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा है कि अमेरिका ने एक “विशाल नौसैनिक बेड़ा” तैयार कर लिया है, जिसे वह तेहरान की ओर तेजी से भेज रहा है और यह “जरूरत पड़े तो तेजी और हिंसा के साथ अपना मिशन पूरा करने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम” है। इस बेड़े का नेतृत्व यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप कर रहा है, जो कई युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों के साथ मध्य पूर्व के पानी में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका का दावा है कि यह तैनाती क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोगियों के साथ साझेदारी और संभावित खतरों को रोकने के लिए है, लेकिन ट्रंप ने खुद कहा कि इसका मकसद ईरान को “मेज़ पर आने” और निष्पक्ष परमाणु समझौते के लिए मजबूर करना भी है। ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और स्थिति को संघर्ष के पहले चरण जैसा बताया है। तेहरान ने यूएन में कहा कि वह “परस्पर सम्मान और हितों पर आधारित बातचीत” के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि “यदि दबाव बढ़ाया गया तो वह पहले जैसी नहीं बल्कि बेहद निर्णायक तरीके से खुद की रक्षा करेगा।” इसके अलावा, ईरान ने कहा है कि वातावरण में धमकियों के बीच कोई कूटनीतिक बातचीत संभव नहीं है और अगर अमेरिका धमकियों के साथ ही शत्रुता दिखाए तो बातचीत असफल रहेगी। स्थिति को और जटिल बनाते हुए कुछ क्षेत्रों के नेताओं, जैसे संयुक्त अरब अमीरात, ने कहा है कि वे किसी भी हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र या भूमि का इस्तेमाल नहीं होने देंगे, और क्षेत्र में तनाव कम करने तथा संवाद के जरिये समाधान निकालने की बात कर रहे हैं। ये सब तब हो रहा है जब ईरान में विरोध प्रदर्शन और उनका कठोर दमन जारी है, जिससे हज़ारों लोगों की मौत और व्यापक गिरफ्तारियाँ हुई हैं। इसने अमेरिका और उसके सहयोगियों में चिंता और बढ़ा दी है कि स्थिति और बिगड़ सकती है। कुल मिलाकर, फिलहाल सीधी लड़ाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के कड़े रुख और अमेरिका की सैन्य मौजूदगी के बढ़ने से यह क्षेत्रीय तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है, और स्थिति अभी भी तेजी से बदल रही हैं।
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