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China के DeepSeek AI ने दुनिया को चौंकाया, पुरानी चिप से दे रहा America को मात

अब तक दुनियाभर में माना जा रहा था कि चीन AI तकनीक के मामले में अमेरिका और पश्चिमी देशों से काफी पीछे है। हालांकि, गूगल की एआई लैब DeepMind के मुख्य मिस हसाबिस ने इस धारणा को बदल दिया है। हाल ही में दिए गए एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि चीन अब हमारी कल्पना से कहीं अधिक नजदीक पहुंच चुका है। उनके अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में चीन अब अमेरिका से केवल कुछ महीनों का ही अंतर रह गया है।

DeepSeek ने बदल दिया खेल

हसाबिस ने बताया कि करीब एक साल पहले जब चीनी लैब Deepeek ने अपना मॉडल लॉन्च किया है, जो पूरी दुनिया के मार्केट में हलचल मचा देगा। चौंकाने वाली बात तो यह थी कि चीन ने यह मॉडल कम बजट और पुरानी तकनीक वाले चिप्स का इस्तेमाल करके बनाया था, फिर भी इसकी परफॉर्मेंस अमेरिकी मॉडल्स के बराबर थी। बता दें कि, अभी अलीबाबा (Alibaba), मूनशॉट (Moonshot) और झिपु (Zhipu) जैसी चीनी कंपनियां भी लगातार बेहतरीन तकनीक पेश कर रही हैं।

इनोवेशन पर अभी सवाल

 लेकिन हासाबिस का मानना है कि चीन ने यह साबित कर दिया है कि वह तेजी से बराबरी कर सकता है, लेकिन असली चुनौती कुछ बिल्कुल नया विकसित करने की है। इनके अनुसार, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि चीनी कंपनियां AI में कोई बड़ा वैज्ञानिक ब्रेकथ्रू कर पाई हैं या नहीं। 

उन्होंने उदाहरण दिया है कि 2017 में गूगल द्वारा विकसित किया गया ‘ट्रांसफॉर्मर’ AI की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था, जिस पर आज ChatGPT और Gemini जैसे बड़े मॉडल आधारित हैं। अब सवाल बनता है कि क्या चीन ऐसा ही कोई नया विचार पेश कर पाएगा।

क्या आगे बढ़ेगा या घटेगा फासला

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय में चिप्स की कमी की वजह से अमेरिका और चीन के AI मॉडल्स के बीच अंतर और बढ़ सकता है। Janus Henderson के पोर्टफोलियो मैनेजर रिचर्ड क्लोड के अनुसार आने वाले समय में अमेरिका का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से विकसित होगा। उनका कहना है कि इस चुनौती को चीनी कंपनियां भी समझ रही हैं। अलीबाबा के विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 3 से 5 वर्षों में अमेरिका से आगे निकलने की संभावना केवल 20 प्रतिशत है, क्योंकि अमेरिका के पास कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहद मजबूत और व्यापक नेटवर्क मौजूद है।

मेंटैलिटी है असली फर्क

हासाबिस का मानना है कि चीन के लिए सबसे बड़ी रुकावट तकनीक नहीं, बल्कि सोच का अंतर है। उन्होंने DeepMind की तुलना “आधुनिक बेल लैब्स” से की, जहां केवल मौजूदा तकनीक को बढ़ाने अलावा नए वैज्ञानिक प्रयोगों को बढ़ावा दिया जाता है। इनके शब्दों में, किसी चीज की नकल करना आसान है, हालांकि कुछ बिल्कुल नया ईजाद करना उससे कहीं ज्यादा कठिन। यही अगली बड़ी चुनौती है। 

DeepMind के संस्थापक हासाबिस एआई की दुनिया के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। उनकी कंपनी गूगल के एआई प्रोडक्ट्स, खासकर  Gemini, की सफलता के पीछे अहम भूमिका निभा रही है। नवंबर में लॉन्च हुआ Gemini 3 बाजार और यूजर्स से अच्छी प्रतिक्रिया पा चुके हैं। 

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