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Wijk aan Zee में प्रज्ञानानंदा की धीमी शुरुआत, थकान और कैंडिडेट्स पर नज़र

नीदरलैंड्स के शहर वाइक आन ज़ी में आर प्रज्ञानानंदा के लिए यह साल पिछले साल जैसा शुरू नहीं हुआ। बता दें कि 2025 में इसी टूर्नामेंट को जीतने के बाद उन्होंने मज़ाक में अर्जुन एरिगैसी के लिए गिफ्ट खरीदने की बात कही थी, क्योंकि आखिरी राउंड में एरिगैसी की जीत ने ही उन्हें खिताब की टाई-ब्रेक की दौड़ में पहुंचाया था। गौरतलब है कि उस टाई-ब्रेक में भी किस्मत ने उनका साथ दिया था, जब निर्णायक मुकाबले में विश्व चैंपियन डी गुकेश ने ज़रूरत से ज्यादा जोखिम लिया और हार बैठे। उस जीत ने प्रज्ञानानंदा के लिए शानदार साल की नींव रखी थी, जिसका अंत उन्होंने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट का टिकट हासिल कर किया। लेकिन मौजूद जानकारी के अनुसार 2026 की शुरुआत उनके लिए चुनौतीपूर्ण रही। वाइक आन ज़ी में शुरुआती दो मुकाबलों में उन्हें अर्जुन एरिगैसी और उज्बेकिस्तान के नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव से हार मिली, जबकि तीसरे राउंड में वह चेक गणराज्य के थाई दाई वान गुयेन के खिलाफ ड्रॉ पर मजबूर हुए, जिनकी रेटिंग उनसे 100 से अधिक अंक कम है। इन नतीजों के बाद तीन राउंड के बाद प्रज्ञानानंदा 0.5 अंक के साथ 14 खिलाड़ियों की तालिका में सबसे नीचे हैं, जहां उनके साथ अनिश गिरी भी मौजूद हैं। गौरतलब है कि दो महीने से थोड़ा अधिक समय बाद होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट को देखते हुए यह स्थिति प्रज्ञानानंदा के लिए चिंता का विषय हो सकती है। हालांकि भारतीय टीम के कोच और ग्रैंडमास्टर श्रीनाथ नारायणन का मानना है कि इन नतीजों को ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार अभी कैंडिडेट्स में काफी समय है और ये हारें प्रज्ञानानंदा को अपनी तैयारी बेहतर करने में मदद भी कर सकती । वाइक आन ज़ी में भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो विश्व चैंपियन डी गुकेश की शुरुआत भी कुछ खास नहीं रही। उन्होंने लगातार तीन मुकाबले ड्रॉ खेले हैं, जिनमें अर्जुन एरिगैसी के खिलाफ खेला गया मुकाबला भी शामिल है। पहले राउंड में गुकेश को जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ जीती हुई बाज़ी हाथ से निकलने का अफसोस रहा था। दूसरी ओर एरिगैसी शानदार लय में नज़र आ रहे हैं और तीन राउंड के बाद दो अंकों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं। वह अब तक अपराजित हैं। मास्टर्स वर्ग में खेल रहे चौथे भारतीय अरविंद चितंबरम ने भी अब तक तीनों मुकाबले ड्रॉ खेले हैं और बिना हार के टूर्नामेंट में बने हुए हैं। वहीं चैलेंजर्स वर्ग में वेदांत पनेसर ने एक जीत के साथ शुरुआत की, लेकिन अगले दो मुकाबलों में उन्हें हार झेलनी पड़ी। श्रीनाथ नारायणन ने यह भी इशारा किया है कि प्रज्ञानानंदा के हालिया प्रदर्शन के पीछे लगातार खेलने से आई मानसिक और शारीरिक थकान एक वजह हो सकती है। खुद प्रज्ञानानंदा ने हाल ही में बताया था कि 2025 में उन्होंने शायद ही घर पर समय बिताया हो और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लगातार टूर्नामेंट खेलते रहे। ऐसे में शीर्ष स्तर के विरोधियों के खिलाफ लगातार खेलने का असर खेल पर दिखना स्वाभाविक है। बता दें कि वाइक आन ज़ी को शतरंज कैलेंडर का सबसे कठिन टूर्नामेंट माना जाता है, जहां 13 राउंड लंबे समय तक कड़ी ठंड में खेले जाते हैं। ऐसे में प्रज्ञानानंदा के सामने अभी 11 मुकाबले बाकी हैं और पिछले साल की तरह एक-दो मौके उनके पक्ष में जा सकते हैं, यही उम्मीद उनके समर्थकों को आगे बढ़ाए हुए हैं।

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