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काठगोदाम-नैनीताल हाईवे टू-लेन बनाने के लिए कटेंगे 17,297 पेड़

काठगोदाम से नैनीताल के बीच का सफर आने वाले समय में जाम मुक्त और सुगम तो हो जाएगा, लेकिन इसके लिए पर्यावरण क्षति के रूप में बड़ी कीमत चुकानी होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 109 को टू-लेन बनाने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत कुल 17,297 हरे पेड़ों को काटने की तैयारी पूरी कर ली गई है। जिससे लिए राष्ट्रीय राजमार्ग ने विस्तृत रिपोर्ट बनाकर वन विभाग को भेज दी है। इनमें से कई पेड़ दशकों पुराने हैं, जो वर्षों से कुमाऊं की पहाड़ियों sकी हरियाली और जैव विविधता को संजोए हुए हैं। डेढ़ लेन से टू-लेन होगा मार्ग करीब 36 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को मौजूदा डेढ़ लेन से बढ़ाकर अब टू-लेन किया जा रहा है। वर्तमान में इस सड़क की चौड़ाई लगभग 7 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 10 मीटर किया जाएगा। इस परियोजना पर केंद्र सरकार 709 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। हाईवे के चौड़ा होने के बाद सड़क के दोनों ओर एक-एक मीटर की ””सोल्डर लाइन”” बनाई जाएगी, जिससे वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल यात्रियों को भी काफी सुविधा होगी। कटान की जद में आने वाले पेड़ों में देवदार, बांज, काफल, चीड़, तुन, साज, जामुन, आम, सुरई, मोरपंखी और पांगर जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं। ये वही जंगल हैं जो नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहते हैं। इन पेड़ों को इस स्वरूप में विकसित होने में 20 से 25 वर्ष का लंबा समय लगता है। सुविधा बनाम पर्यावरण हाईवे के चौड़ीकरण से जहां पर्यटन सीजन में लगने वाले घंटों के जाम से राहत मिलेगी, वहीं एक साथ हजारों पेड़ों को काटे जाने को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में भारी चिंता है। पहाड़ों पर बढ़ते भूस्खलन और जलवायु परिवर्तन के बीच इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों का कम होना भविष्य के लिए चुनौती बन सकता है। साथ ही अतिक्रमण पर नोटिस, शिफ्ट होंगी लाइनें एनएचएआई ने सड़क चौड़ीकरण की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। वर्तमान में वन विभाग के साथ भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। सड़क के दायरे में आ रही बिजली और पानी की लाइनों को शिफ्ट करने का काम भी जल्द शुरू होगा। इसके साथ ही हाईवे किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होगी, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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